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कुल 14 परिणाम मिले खोज शब्द: कश्ती

काग़ज़ की सफ़ेद कश्ती और गहरा समंदर

एक छोटे से गाँव में आरव नाम का लड़का रहता था, जिसे कागज की कश्तियाँ बनाने का बहुत शौक था। वह हर शाम नदी के किनारे बैठकर अपनी कश्तियाँ पानी में तैरता था। लोग उसका मजाक उड़ाते थे कि ये कागज की नावें पानी में गल जाएंगी और कभी पार नहीं पहुँचेंगी। लेकिन आरव का विश्वास अडिग था। एक दिन उसने एक बड़ी और मजबूत कागज की नाव बनाई, जिस पर मोम की परत चढ़ाई थी। जब उसने उसे धारा में उतारा, तो वह नाव तेज लहरों से मुकाबला करती हुई बहुत दूर निकल गई। इस घटना ने पूरे गाँव को सिखाया कि यदि इरादे मजबूत हों, तो साधन चाहे छोटे हों, सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
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कागज़ की कश्तियाँ

बरसात की पहली बूँद ने सूखी मिट्टी को महका दिया था। कॉलेज के गलियारे में अहान और मीरा अपने नोट्स बचाते हुए एक कैंटीन के शेड के नीचे आकर खड़े हो गए। दोनों के बीच ज़्यादा बातचीत नहीं थी, बस एक अनकही सी खामोश पहचान थी जो पिछले कुछ महीनों से पनप रही थी। अचानक अहान ने अपनी जेब से एक पुराना कागज़ निकाला और फुर्ती से एक छोटी सी नाव बना डाली। उसने उसे पानी की बहती धारा में छोड़ते हुए कहा कि हमारी उम्मीदें भी इसी नाव जैसी हैं, जो हर लहर से लड़कर आगे बढ़ती हैं। मीरा मुस्कुराई और उसने अपनी किताब से एक सूखा पत्ता निकालकर उस नाव पर रख दिया। उस छोटे से पल ने दोनों के दिलों के फासलों को हमेशा के लिए मिटा दिया और एक नए रिश्ते की खूबसूरत शुरुआत हुई।
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कागजी कश्ती

भावनाओं के समंदर में एक कश्ती उतारी थी,
जिसे सिर्फ भरोसे की हवाओं का सहारा था।
मगर एक ही झटके में सब तबाह हो गया,
वो किनारा भी आज हमें पराया लगा।
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तूफान और कश्ती

फौलादी जिगर वाले तूफानों से नहीं डरा करते, जिनकी कश्ती में दम हो वो भंवर से नहीं डरा करते। लहरों की जिद है अगर किनारा डुबाने की, तो हमारा भी इरादा पार उतर जाने का है।
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सोच और दिशा

हवाएं कभी किसी की दिशा देखकर नहीं चलतीं, हमे खुद अपनी कश्ती का रुख तय करना होता है। सही सोच और पक्का इरादा हर तूफ़ान को हरा देता है।
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बचपन की याद

कागज की कश्ती और बारिश का पानी, वो दौर भी क्या कमाल का था। जिम्मेदारियों से कोसों दूर, बस खुशियों का खजाना पास था।
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कश्ती और किनारा

जिंदगी के समंदर में हम अकेले थे, तू आया तो लगा जैसे किनारे मिल गए। लाख ग़मों के समंदर क्यों ना हों पार, जब दोस्त जैसे मांझी साथ चल दिए।
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बचपन की गलियां

वो कागज की कश्ती और बारिश का पानी, आज भी याद आती है वो पुरानी कहानी। भागती दौड़ती जिंदगी में सुकून ढूंढते हैं, पीछे छूट गई जो थी सुहानी जवानी।
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तन्हा समंदर

लहरों से शिकवा करें या साहिल से गिला, यहाँ तो हर कोई अपने ही गम में डूबा मिला। समंदर सा विशाल था सीने में दर्द का समंदर, पर कोई कश्ती हमें थामने ना मिला।
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