टूटा हुआ विश्वास

कुछ रिश्ते वक्त के साथ ऐसे छूटे, जैसे पतझड़ में पेड़ से सूखे पत्ते टूटते हैं। अब तो खुद की आवाज से भी डर लगने लगा है, क्योंकि हर खुशी के पीछे एक छिपा हुआ धोखा नजर आता है।

सन्नाटे की गूंज

इन दीवारों से अब क्या शिकवा करें, जब अपने ही साये ने साथ छोड़ दिया। अंधेरे कमरे में बैठी यह तन्हाई, हर पुराने जख्म को फिर से कुरेद जाती है।

रेत के महल

हमने समंदर किनारे जो उम्मीद के महल बनाए थे, लहरों ने एक ही झटके में सब कुछ बहा दिया और हम देखते रह गए।

अधूरी चाय

तुम्हारी पसंद की वो कड़क चाय अब फीकी लगने लगी है, लगता है तुम्हारे जाने से हमारी सुबह की तासीर बदल गई है।

बदलता शहर

शहर वही है, गलियां वही हैं और लोग भी वही हैं, बस फर्क इतना है कि अब उन गलियों में हमारा कोई अपना नहीं रहता।

अजनबी रास्ते

सफर लंबा था और हम अकेले रह गए, कारवां गुजरता गया और हम पीछे छूट गए। किसी को हमारी परवाह कहां थी, हम यूं ही खुद से रूठ गए।

बिखरे पन्ने

किताब के पन्नों में दबाकर रखे थे जो गुलाब कभी, आज वो सूखे तो महक तो नहीं आई, मगर पुरानी यादों ने जीना मुहाल कर दिया।

टूटते तारे

रात के अंधेरे में टूटते तारे को देख कर, हमने भी अपनी किसी हसरत को रुखसत कर दिया। जो अपना कभी हो ही नहीं सका, उसे दिल से बेदखल कर दिया।

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इस संग्रह की सबसे पढ़ी रचनाएँ

अधूरे ख्वाब

कुछ रास्ते खुद ब खुद मुड़ जाते हैं, दिल के अरमान आंसुओं में जुड़ जाते हैं। तन्हाइयों का सफर अब आसान लगता है, जब अपने ही बेगाने बन जाते हैं।

खामोशियां

लबों पर हंसी सजाए रखते हैं सब के लिए, अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं अकेले। कोई तो समझे इस खामोशी की जुबान को, हम खुद से ही रोज बिछड़ते रहते हैं।

बिछड़े रास्ते

वक्त के साथ सब बदल गया यहां, हमारा साया भी अब हमसे रूठ गया। उम्मीदों की जो डोर थामी थी हमने, वो एक झटके में आज टूट गया।

यादों का साया

तेरी यादों के सहारे काट रहे हैं दिन, चैन से सो भी नहीं पाते अब तेरे बिन। हर एक तारा पूछता है तेरा पता मुझसे, कहो कैसे समझाएं इस दिल को हम।