टूटा हुआ विश्वास
कुछ रिश्ते वक्त के साथ ऐसे छूटे, जैसे पतझड़ में पेड़ से सूखे पत्ते टूटते हैं। अब तो खुद की आवाज से भी डर लगने लगा है, क्योंकि हर खुशी के पीछे एक छिपा हुआ धोखा नजर आता है।
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