खामोश तन्हाई
पत्थर दिल सनम से अब क्या गिला करें, कांटे ही मिले जब नसीब में फूल क्या खिला करें। खुद ही बुझा ली हमने उम्मीदों की वो शम्मा, अंधेरे में अब अकेले ही जिया करें।
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