#दोस्ती शायरी
हिन्दी
कश्ती और किनारा
“
जिंदगी के समंदर में हम अकेले थे, तू आया तो लगा जैसे किनारे मिल गए। लाख ग़मों के समंदर क्यों ना हों पार, जब दोस्त जैसे मांझी साथ चल दिए।
”
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