अनकही मुलाक़ातें
शहर के व्यस्त बाज़ार में एक छोटी सी फूलों की दुकान थी जहाँ आरव हर रोज़ सुबह एक गुलाब खरीदने आता था। दुकान पर काम करने वाली मीरा चुपचाप उसे वो गुलाब थमा देती थी, बिना किसी शब्द के। महीनों बीत गए और उनके बीच केवल नज़रों का संवाद रहा, कोई औपचारिकता नहीं, कोई सवाल नहीं। एक दिन अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई और आरव दुकान की आड़ में रुक गया। मीरा ने उसे गर्म चाय का कुल्हड़ आगे बढ़ाया और धीरे से मुस्कुराई। उस छोटी सी मुस्कान ने उनके बीच के सारे अनकहे फासले मिटा दिए और दिल की बात बिना कहे ही एक-दूसरे तक पहुँच गई।
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