ईमानदार कुम्हार और राजा का पुरस्कार
किसी राज्य में एक साधारण कुम्हार रहता था जिसका नाम मदन था। मदन अपनी कला में अत्यंत निपुण था और वह हमेशा मजबूत और सुंदर मिट्टी के बर्तन बनाता था। एक बार राजा ने अपने दरबार के लिए कुछ विशेष कलात्मक बर्तनों की मांग की। मदन ने महीनों की कड़ी मेहनत के बाद राजा के लिए सबसे उत्कृष्ट बर्तन तैयार किए। जब वह उन्हें राजमहल ले जा रहा था, तब रास्ते में एक गरीब भूखाया यात्री मिला जो ठंड से कांप रहा था। मदन का दिल पसीज गया और उसने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा और भोजन उस यात्री को दे दिया। राजदरबार में जब उसने बर्तन प्रस्तुत किए, तो राजा उसकी कला से बहुत प्रभावित हुए। राजा ने उसे भारी मात्रा में स्वर्ण मुद्राएं पुरस्कार के रूप में दीं। लेकिन मदन ने केवल उतनी ही राशि स्वीकार की जितने उसके बर्तनों का वास्तविक मूल्य था, और बाकी धन राज्य के गरीबों के कल्याण के लिए वापस कर दिया। राजा उसकी इस परम ईमानदारी और परोपकार की भावना से अत्यंत प्रसन्न हुए और उसे राज्य का मुख्य शिल्कार घोषित किया। मदन ने साबित कर दिया कि ईमानदारी और दयालुता से बढ़कर इस दुनिया में कोई दूसरा आभूषण नहीं है।
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