#प्रेम कहानी
हिन्दी
संगीत की सरगम
“
कबीर को शास्त्रीय संगीत से बेहद लगाव था और वह हर शाम पार्क में अकेले बैठकर बांसुरी बजाया करता था। एक दिन उसने महसूस किया कि कोई और भी उसके सुरों में अपनी गिटार की धुन मिला रहा है। पलटकर देखा तो सामने सिमरन खड़ी थी, जिसकी आँखों में संगीत के प्रति वही गहरा जुनून था जो कबीर के भीतर था। दोनों ने कभी एक दूसरे से अपने नाम नहीं पूछे थे, बस उनकी धुनें ही उनका परिचय बन गई थीं। समय बीतता गया और उनके साज़ आपस में इस कदर घुलमिल गए कि दो अलग-अलग धुनें अब एक ही सुर में ढल चुकी थीं, जो जीवनभर का साथ बन गया।
👁️ 1 बार पढ़ा गया
❤️ लोगों ने पसंद किया
टिप्पणियाँ
अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।
लॉगिन करके टिप्पणी करें। प्रकाशित होने से पहले हर टिप्पणी की समीक्षा होती है।