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प्रेम कहानी

प्यार पर छोटी कहानियाँ, पूरा चाप के साथ।

📖 50 रचनाएँ

चाय और पुरानी डायरी

सर्दियों की एक शांत सुबह जब रिया अपने पुराने बक्से को साफ कर रही थी, तब उसे कॉलेज के दिनों की एक भूली-बिसरी डायरी मिली। पन्ने पलटने पर उसमें सूखे हुए गुलाब के फूल और राघव के हाथ की कुछ अनकही कविताएँ नजर आईं। कई साल पहले गलतफहमियों के कारण दोनों अलग हो गए थे और शहर छूट गए थे। उस डायरी ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया। रिया ने बिना सोचे-समझे राघव के पुराने नंबर पर एक संदेश भेज दिया। कुछ ही मिनटों बाद फोन की घंटी बजी और दूसरी तरफ राघव की वही जानी-पहचानी आवाज गूंजी। उस एक फोन कॉल ने वर्षों की दूरी को पलभर में मिटा दिया और दोनों ने फिर से मिलने का फैसला किया।

बारिश का पता

रिया ने अरुण को भीगते हुए इसलिए नहीं पुकारा कि वह छाता लाए। उसने पुकारा क्योंकि बारिश में अरुण का नाम लेना उसे घर जैसा लगता था। अरुण छाता भूल आया, पर दो स्टूल छत के नीचे खिसका दिए। कहानी वहीं पूरी हुई, जहाँ दोनों ने एक ही दिशा में पानी गिरते देखा।

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इस संग्रह की सबसे पढ़ी रचनाएँ

पुरानी मीनार की सीढ़ियाँ

शहर के बीचों-बीच खड़ी वह पुरानी मीनार पर्यटकों के लिए सिर्फ एक खंडहर थी, पर कबीर और मीरा के लिए वह उनका निजी इतिहास थी। कबीर हर इतवार को वहाँ अपनी अधूरी पेंटिंग पूरी करने आता और मीरा शहर के इतिहास पर शोध करने। एक दिन अचानक हुई बारिश से बचने के लिए दोनों एक ही मेहराब के नीचे आ गए। बातों का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ कि इतिहास के पन्ने कब इश्क में बदल गए, किसी को पता ही नहीं चला। जब मीनार की घंटी ने शाम ढलने का ऐलान किया, तो दोनों समझ चुके थे कि उनका सफर अब अकेले का नहीं रहा।

बारिश का पता

रिया ने अरुण को भीगते हुए इसलिए नहीं पुकारा कि वह छाता लाए। उसने पुकारा क्योंकि बारिश में अरुण का नाम लेना उसे घर जैसा लगता था। अरुण छाता भूल आया, पर दो स्टूल छत के नीचे खिसका दिए। कहानी वहीं पूरी हुई, जहाँ दोनों ने एक ही दिशा में पानी गिरते देखा।

पुरानी हवेली और महकती हुई अलमारी

शहर के एक कोने में खड़ी सदियों पुरानी हवेली के जीर्णोद्धार का जिम्मा मयंक को मिला था जो इतिहास और वास्तुकला से प्यार करता था। काम के दौरान उसे हवेली के एक गुप्त कमरे में लकड़ी की पुरानी अलमारी मिली जिस पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी। जब मयंक ने उसे खोला तो अंदर से पुराने खतों का एक बंडल और सूखे गुलाब के फूल मिले जिन पर किसी अनजान जोड़े के प्रेम के किस्से दर्ज थे। उन खतों को पढ़ते-पढ़ते मयंक अतीत की दुनिया में खो गया और उसे महसूस हुआ कि दीवारें भले ही पुरानी हो जाएं लेकिन सच्चा प्रेम कभी नहीं मिटता। उसी शाम हवेली के बगीचे में उसे अहाना मिली जो इस हवेली के इतिहास पर शोध करने आई थी। खतों की उस विरासत ने दोनों को एक ऐसा सूत्र में बांध दिया जहाँ इतिहास और वर्तमान मिलकर एक नई प्रेम गाथा लिखने लगे।

रेत पर लिखे नाम

समुद्र की लहरें किनारे को बार-बार छू रही थीं और सूरज डूबने की तैयारी में था। कबीर और मीरा हर साल इस समुद्री तट पर आते थे क्योंकि यहीं उनकी पहली मुलाकात हुई थी। इस बार माहौल थोड़ा अलग था क्योंकि कबीर शहर छोड़कर विदेश जाने वाला था और दूरी उनके रिश्ते की परीक्षा लेने वाली थी। मीरा चुपचाप रेत पर कबीर का नाम लिख रही थी और लहरें उसे मिटा रही थीं। कबीर ने मीरा का हाथ थाम लिया और कहा कि नाम भले ही रेत से मिट जाए, लेकिन दिल पर लिखा रिश्ता कभी नहीं मिटेगा। उस शाम दोनों ने वादा किया कि समुद्र की दूरियों के बावजूद उनका प्यार हमेशा अमर रहेगा।