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डरावनी कहानी

हल्की सिहरन वाली छोटी कहानियाँ।

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काली झील का साया

शहर से दूर पहाड़ों के बीच स्थित काली झील का पानी हमेशा शांत और काला रहता था, जिसके पास जाने से लोग डरते थे। सोहन को फोटोग्राफी का शौक था और वह एक शाम खूबसूरत तस्वीरें लेने के लिए उसी झील के किनारे पहुंच गया। कैमरे के लेंस से देखते हुए उसे पानी की सतह पर एक सुंदर स्त्री तैरती हुई दिखाई दी, जो उसे अपनी ओर बुला रही थी। सोहन सम्मोहित सा झील की तरफ बढ़ता चला गया, तभी उसे एहसास हुआ कि पानी में केवल उसका अपना ही प्रतिबिंब नहीं, बल्कि कोई दूसरा साया भी है। जैसे ही उसने पीछे मुड़ना चाहा, पानी के भीतर से कई ठंडे हाथों ने उसके पैरों को जकड़ लिया। वह मदद के लिए चिल्लाना चाहता था, लेकिन उसके गले से कोई आवाज़ नहीं निकली और वह धीरे-धीरे काले पानी में समाता चला गया। सुबह उसका कैमरा झील के किनारे पर लावारिस मिला, लेकिन सोहन का कोई अता-पता नहीं था।

लाल दरवाजे वाला कमरा

गांव के एक पुराने घर में हमेशा बंद रहने वाले लाल दरवाजे के पीछे से हर रात पायल की छनक सुनाई देती थी। रमित को इस बात की बड़ी उत्सुकता थी कि उस कमरे के अंदर आखिर क्या है। एक अमावस्या की रात, जब पूरा घर गहरी नींद में था, रमित ने हिम्मत जुटाई और धीरे से उस लाल दरवाजे की कुंडी खोल दी। कमरे के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था और बीचों-बीच एक पुरानी खाट पर धूल जमी थी। तभी अचानक खिड़की से आई ठंडी हवा ने दरवाजा बंद कर दिया और कमरे का तापमान शून्य तक गिर गया। रमित ने मुड़कर देखा तो कोने में रखी अलमारी का शीशा धुंधला हो गया था और उस पर किसी छोटे बच्चे के हाथ के छाप उभर रहे थे। उसने तुरंत भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे का हैंडल अंदर से लॉक हो चुका था और पीछे से एक ठंडी फुसफुसाहट सुनाई दी, अब तुम कभी बाहर नहीं जा सकते।

आधी रात का आईना

नताशा ने अपने नए घर के बेडरूम में एक पुराना एंटीक आईना लगाया था, जिसकी फ्रेम पर बारीक नक्काशी की गई थी। वह अक्सर रात को सोने से पहले उस आईने में अपने बाल संवारती थी। एक रात, जब उसने घड़ी में बारह बजते देखे, तो उसने महसूस किया कि आईने में उसका अक्स उसकी नकल नहीं कर रहा है। उसका अक्स अपनी जगह पर स्थिर था, जबकि नताशा बिस्तर पर पीछे हट रही थी। अचानक आईने के भीतर से एक ठंडी हवा का झोंका आया और कांच पर धुंध जम गई। उस धुंध पर किसी ने अपनी उंगली से लिखा - अब मैं बाहर आ रही हूं। नताशा ने चीखने की कोशिश की लेकिन उसकी आवाज गले में ही घुट गई और चारों ओर घना अंधेरा छा गया।

रेलवे स्टेशन का आखिरी मुसाफिर

रात के दो बज चुके थे और मानसिंह अपनी आखिरी ट्रेन का इंतजार वीरान प्लेटफॉर्म पर कर रहा था। स्टेशन पर उसके अलावा कोई टिकट कलेक्टर भी नजर नहीं आ रहा था। तभी पटरियों पर लोहे की रगड़ खाने की भयानक आवाज गूंजी और एक पुरानी भाप इंजन वाली ट्रेन आकर रुक गई। डिब्बों की खिड़कियों से कोई रोशनी नहीं आ रही थी। जिज्ञासावश मानसिंह ने एक डिब्बे का दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा। अचानक ट्रेन तेजी से चल पड़ी और अंदर बैठे सभी यात्री बिना चेहरे के काले साये निकले। उन्होंने मानसिंह को घेर लिया। सुबह जब पैसेंजर ट्रेन आई, तो मानसिंह उस पटरी से कई मील दूर बेहोश मिला, और उसके हाथ में उसी पुरानी ट्रेन का एक जंग लगा टिकट था।

जंगलों के बीच का पुराना कुआं

गांव के छोर पर स्थित एक सूखे कुएं के बारे में बुजुर्गों का कहना था कि वहां शाम के बाद मत जाना। शहर से आया आलोक इस अंधविश्वास को दूर करने की चुनौती मान बैठा। एक अमावस्या की रात वह उस कुएं के पास पहुंचा और टॉर्च की रोशनी अंदर डाली। कुएं की गहराई से एक मीठी और जानी-पहचानी आवाज ने उसे पुकारा, आओ मुझे बाहर निकालो। जैसे ही वह कुएं की मुंडेर के और करीब गया, उसे एहसास हुआ कि वह आवाज उसकी अपनी ही थी, जो किसी मरे हुए गले से निकल रही थी। वह डर के मारे पीछे हटा और गांव की ओर भागा। आज भी वह उस रात को याद करके कांप उठता है, क्योंकि उसने खुद अपनी लाश कुएं के भीतर तैरते हुए देखी थी।

सुदूर पहाड़ियों का अकेला केबिन

पहाड़ियों के उस ठंडे और कोहरे से ढके इलाके में रोहन ने एक अकेला लकड़ी का केबिन किराए पर लिया था। वह अपनी किताब पूरी करने की शांति चाहता था। पहले दो दिन सब ठीक रहा, लेकिन तीसरे दिन से अजीब घटनाएं होने लगीं। रात को रसोईघर से बर्तन गिरने की आवाजें आतीं, और जब वह देखने जाता, तो वहां कोई नहीं होता। मोड़ तब आया जब उसने अपने कमरे के बंद शीशे पर खुद को नहीं, बल्कि एक धुंधले चेहरे को अपने पीछे खड़े देखा। उसने तुरंत भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे बाहर से बंद थे। सुबह जब सूरज निकला, तो केबिन बिल्कुल शांत था, और उसके लैपटॉप पर केवल एक वाक्य लिखा था - तुम कभी अकेले नहीं थे।

गुमशुदा डायरी का पन्ना

लाइब्रेरी के सबसे अंधेरे कोने में प्रिया को धूल से सनी एक डायरी मिली, जिसका पन्ना खोलने पर केवल एक ही वाक्य लिखा था - आज रात तुम्हारा आखिरी दिन है। उसने हँसकर उसे मजाक समझा और डायरी अपने साथ घर ले आई। रात को जब उसने पढ़ाई करते समय उस डायरी को दोबारा खोला, तो उसने देखा कि लिखा हुआ वाक्य बदल चुका था और अब वहाँ लिखा था - तुम अब बिस्तर के नीचे हो। डर के मारे उसका दिल जोर से धड़कने लगा, और तभी बिस्तर के नीचे से किसी ठंडे हाथ ने उसके पैर को मजबूती से पकड़ लिया।

पुरानी हवेली की परछाइयां

गांव के छोर पर बनी खंडहर नुमा हवेली में जाने की हिम्मत कोई नहीं करता था, लेकिन कबीर ने एक शर्त के तहत वहां जाने का फैसला किया। उसने हाथ में टॉर्च ली और लकड़ी के चरमराते दरवाजे को धक्का देकर अंदर कदम रखा। अंदर कदम रखते ही उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे सैकड़ों आंखें एक साथ उसी को घूर रही हों। उसने टॉर्च की रोशनी दीवारों पर डाली, जहाँ पुरानी तस्वीरें टंगी थीं और हर तस्वीर की आंखें उसकी तरफ घूम रही थीं। अचानक एक भारी आवाज गूंजी कि यहाँ से कभी कोई वापस नहीं गया, और दरवाजा अपने आप बंद हो गया।

सपनों का खौफनाक सफर

अमित को पिछले कुछ दिनों से एक ही सपना बार-बार आ रहा था, जिसमें एक सुनसान सड़क पर कोई उसका पीछा कर रहा था। शुरुआत में उसने इसे महज एक आम सपना समझकर नजरअंदाज कर दिया, लेकिन एक रात उसने सपने में खुद को उस सड़क पर सचमुच दौड़ते हुए पाया। जब उसकी नींद खुली, तो उसके पैरों में असली धूल और मिट्टी जमी हुई थी। अगली रात, उसने तय किया कि वह सपने के अंत तक जाएगा और उस पीछा करने वाले का चेहरा देखेगा। जैसे ही वह मुड़ा, उसने पाया कि वह भयानक साया कोई और नहीं बल्कि उसका अपना ही अतीत था।

नीली रोशनी का साया

रोहन ने जब अपने नए कमरे में प्रवेश किया, तो उसे दीवारों पर अजीब से नीले धब्बे दिखाई दिए। उसे लगा कि शायद यह सीलन का असर होगा, इसलिए उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। रात के ठीक बारह बजे, कमरे का तापमान अचानक बहुत कम हो गया और एक अजीब सी फुसफुसाहट सुनाई देने लगी। रोहन ने उठकर देखा तो कोने में रखी पुरानी अलमारी अपने आप खुल रही थी। अलमारी के भीतर से कोई अदृश्य ताकत बाहर आई और उसके ठीक सामने आकर खड़ी हो गई। उसने डरकर आंखें बंद कर लीं और जब सुबह हुई, तो वह कमरा पूरी तरह बदल चुका था।

आधी रात का संगीत

अमित एक संगीतकार था जो अपने नए एल्बम की रचना के लिए एक शांत पहाड़ी बंगले में रहने गया था। हर रात ठीक बारह बजे, उसके कमरे में रखे बंद पियानो से खुद-ब-खुद एक उदास धुन बजने लगती थी। शुरू में उसे लगा कि यह हवा का असर होगा, लेकिन एक रात उसने पियानो के पास जाकर देखा कि अदृश्य उंगलियां उन चाबियों पर थिरक रही थीं। जैसे ही उसने पियानो को छूना चाहा, कमरे के सारे शीशे एक साथ चकनाचूर हो गए और हवा में एक अजीब सी आवाज गूंजी कि यह संगीत अब कभी खत्म नहीं होगा।

काले पानी का रहस्य

शहर के एक पुराने और गहरे कुएं के पास जाने से हर कोई डरता था। लोक कथाओं के अनुसार, उस कुएं का पानी किसी की प्यास नहीं बुझाता बल्कि उसकी आत्मा खींच लेता है। तरुण एक विज्ञान का छात्र था और इन अंधविश्वासों को नहीं मानता था। एक पूर्णिमा की रात, वह उस कुएं के पास गया और उसका पानी झांककर देखने लगा। पानी बिल्कुल शांत था, लेकिन अचानक उसमें से एक काले धुएं का हाथ निकला और तरुण की कलाई को पकड़ लिया। तरुण ने जब खुद को छुड़ाने की कोशिश की, तो कुएं के भीतर से सैकड़ों डरावनी आवाजें आने लगीं जो उसका नाम पुकार रही थीं।

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आखरी बस की सवारी

रोहन अपने दफ्तर से लौट रहा था और रात काफी हो चुकी थी। उसने घर जाने के लिए हाईवे पर आखिरी बस पकड़ी। बस के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था और केवल एक मंद सी रोशनी जल रही थी। ड्राइवर ने बिना किसी से कुछ कहे बस चलाना शुरू कर दिया। कुछ दूर जाने के बाद रोहन ने देखा कि बस में बैठे बाकी यात्री अजीब तरह से चुप थे और उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। जब रोहन ने कंडक्टर से टिकट मांगा, तो कंडक्टर ने अपनी गर्दन घुमाई और उसकी आँखें गायब थीं। तभी उसे याद आया कि यह वही बस थी जो पिछले हफ्ते एक भयानक दुर्घटना में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

पुराने कुएं का सच

गाँव के बाहर बने एक सुनसान खेत में एक पुराना कुआँ था, जिसके बारे में कहा जाता था कि उसमें से रात को संगीत की आवाजें आती हैं। राहुल और उसके दोस्तों ने इस बात की सच्चाई जानने के लिए रात के समय उस कुएं के पास जाने की योजना बनाई। जब वे वहां पहुंचे, तो वास्तव में कुएं के भीतर से घुंघरू की छनक और मधुर संगीत सुनाई दे रहा था। राहुल ने जैसे ही टॉर्च की रोशनी कुएं के अंदर डाली, पानी में तैरता हुआ एक चेहरा दिखाई दिया जो जोर-जोर से हंस रहा था। उसी पल राहुल के दोस्तों के पैर जमीन में धंस गए और कुएं से एक लंबा हाथ बाहर निकल आया।

अंधेरे कमरे का रहस्य

हमारे नए मकान का एक कमरा हमेशा ठंडा रहता था और वहां से अजीब सी सरसराहट की आवाजें आती थीं। मैंने एक रात हिम्मत करके उस कमरे का दरवाजा खोला तो अंदर कोई नहीं था, बस एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी थी जो खुद-ब-खुद हिल रही थी। उस पर धूल की परत जमी थी जिस पर किसी छोटे बच्चे के नंगे पैरों के निशान बन रहे थे। अचानक कमरे की खिड़की अपने आप जोर से बंद हो गई और हवा में एक डरावनी फुसफुसाहट गूंजी। मैंने जब पीछे मुड़कर देखना चाहा तो कोई अदृश्य शक्ति ने मेरा गला दबोच लिया और मेरी सांसें रुकने लगीं। किसी तरह मैंने खुद को छुड़ाया और उस घर से बाहर भागा, लेकिन आज भी मुझे लगता है कि वो परछाई मेरा पीछा कर रही है।

वीरान सड़क का यात्री

कार से घर लौटते वक्त जंगल के रास्ते में मेरी गाड़ी अचानक खराब हो गई और फोन का नेटवर्क भी गायब हो गया। मैंने दूर एक पेड़ के नीचे एक बुजुर्ग को हाथ देते हुए देखा और मदद मांगने के लिए उनकी तरफ बढ़ा। जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा, मैंने देखा कि उनके पैर जमीन पर टिके नहीं थे बल्कि हवा में तैर रहे थे और उनका चेहरा सफेद पड़ चुका था। उन्होंने बिना अपना सिर घुमाए मुझसे पूछा कि क्या तुमने मेरी खोई हुई मंजिल देखी है। डर के मारे मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई और मैं भागकर अपनी कार में बैठ गया, लेकिन कार का इंजन लाख कोशिश के बाद भी स्टार्ट नहीं हुआ। वो भयानक आकृति धीरे-धीरे मेरी कार के शीशे के पास आने लगी और फिर सब कुछ अंधेरे में डूब गया।