#प्रेम कहानी
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रंगों का बंधन
“
होस्टेल के उस कमरे में रंगों की खुशबू फैली हुई थी और हर तरफ गुलाल बिखरा हुआ था। अनमोल इस बात से डरता था कि कोई उसके करीब आकर उसे रंग न लगा दे, क्योंकि वह भीड़ से दूर रहना पसंद करता था। तभी नयना हाथ में नीले और गुलाबी रंग की थाली लेकर तेजी से कमरे में घुसी और सीधे अनमोल के गालों पर रंग मल दिया। अनमोल ने चौंककर देखा तो सामने नयना की खिलखिलाती हुई हँसी थी, जिसमें किसी प्रकार का कोई छल नहीं था। उस दिन रंगों की आड़ में अनमोल के दिल की वो हिचक हमेशा के लिए खत्म हो गई जो वह वर्षों से छुपाए बैठा था। होली के उस जीवंत उत्सव ने दोनों की दुनिया को एक नए और रंगीन रिश्ते में पिरो दिया, जो सातों जन्मों तक रहने का वादा कर गया।
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