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कुल 12 परिणाम मिले खोज शब्द: कमरा

लाल दरवाजे वाला कमरा

गांव के एक पुराने घर में हमेशा बंद रहने वाले लाल दरवाजे के पीछे से हर रात पायल की छनक सुनाई देती थी। रमित को इस बात की बड़ी उत्सुकता थी कि उस कमरे के अंदर आखिर क्या है। एक अमावस्या की रात, जब पूरा घर गहरी नींद में था, रमित ने हिम्मत जुटाई और धीरे से उस लाल दरवाजे की कुंडी खोल दी। कमरे के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था और बीचों-बीच एक पुरानी खाट पर धूल जमी थी। तभी अचानक खिड़की से आई ठंडी हवा ने दरवाजा बंद कर दिया और कमरे का तापमान शून्य तक गिर गया। रमित ने मुड़कर देखा तो कोने में रखी अलमारी का शीशा धुंधला हो गया था और उस पर किसी छोटे बच्चे के हाथ के छाप उभर रहे थे। उसने तुरंत भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे का हैंडल अंदर से लॉक हो चुका था और पीछे से एक ठंडी फुसफुसाहट सुनाई दी, अब तुम कभी बाहर नहीं जा सकते।
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नीली रोशनी का साया

रोहन ने जब अपने नए कमरे में प्रवेश किया, तो उसे दीवारों पर अजीब से नीले धब्बे दिखाई दिए। उसे लगा कि शायद यह सीलन का असर होगा, इसलिए उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। रात के ठीक बारह बजे, कमरे का तापमान अचानक बहुत कम हो गया और एक अजीब सी फुसफुसाहट सुनाई देने लगी। रोहन ने उठकर देखा तो कोने में रखी पुरानी अलमारी अपने आप खुल रही थी। अलमारी के भीतर से कोई अदृश्य ताकत बाहर आई और उसके ठीक सामने आकर खड़ी हो गई। उसने डरकर आंखें बंद कर लीं और जब सुबह हुई, तो वह कमरा पूरी तरह बदल चुका था।
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समुद्र किनारे का वीरान लाइटहाउस

तटीय इलाके का वह पुराना लाइटहाउस पिछले पचास सालों से बंद पड़ा था। विक्रम को रोमांचक जगहों पर घूमने का शौक था, इसलिए वह उस खण्डहर नुमा लाइटहाउस के अंदर चला गया। अंदर सीढ़ियां बहुत संकरी थीं और दीवारों पर नमी से अजीब सी बदबू आ रही थी। सबसे ऊपर पहुंचकर उसने खिड़की से समंदर की लहरों को देखा। तभी पीछे से किसी ने भारी आवाज में कहा कि यहाँ से तुरंत चले जाओ। विक्रम ने मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था, लेकिन कमरा अंदर से बंद हो चुका था। हवा का एक तेज झोंका आया और लाइटहाउस का पुराना बल्ब जल उठा। उसने देखा कि कोने में रखी कुर्सी पर एक इंसान बैठा है जिसका चेहरा गायब था। विक्रम किसी तरह जान बचाकर वहां से भागा।
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घड़ी की टिक-टिक और वह साया

रात के ठीक ढाई बजे थे जब विक्रम की आँख खुली। कमरे की दीवार पर टंगी पुरानी घंटी वाली घड़ी अचानक बिना चाबी के बजने लगी थी। उसकी हर टिक-टिक से ऐसा लग रहा था जैसे कोई अदृश्य इंसान कमरे के भीतर ही चल रहा हो। विक्रम ने बिस्तर से उठकर लाइट जलाई, लेकिन कमरा पूरी तरह खाली था सिवाय उस पुरानी दीवार घड़ी के। तभी उसे अपने पीछे किसी के सांस लेने की आवाज़ सुनाई दी, जो बिल्कुल उसके कान के पास थी। जैसे ही उसने मुड़कर देखा, घड़ी की सुइयां अचानक उल्टी दिशा में तेजी से घूमने लगीं और कमरे का तापमान शून्य तक गिर गया। वह समझ गया कि वह अकेला नहीं था।
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कांच के पीछे का चेहरा

अमित ने अपने नए कमरे की दीवार पर एक बहुत बड़ा पुराना आईना लगवाया था, जो कबाड़खाने से बेहद सस्ती कीमत पर मिला था। शुरुआत के कुछ दिन तो सब सामान्य रहा, लेकिन फिर उसने गौर किया कि आईने में दिखने वाली उसकी परछाई उसके साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही थी। एक रात जब वह अपने बाल सुधार रहा था, तब आईने में दिख रहे उसके अक्स ने उसकी तरफ देखकर एक खौफनाक मुस्कान दी और अपना गला धीरे से पकड़ लिया। अमित डर के मारे चीख पड़ा और उसने हथौड़ा उठाकर उस आईने पर जोरदार वार किया। जैसे ही कांच के टुकड़े बिखरे, उसके गले पर अचानक गहरे नीले निशान उभर आए और वह बेहोश हो गया।
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अंधेरे कमरे का रहस्य

हमारे नए मकान का एक कमरा हमेशा ठंडा रहता था और वहां से अजीब सी सरसराहट की आवाजें आती थीं। मैंने एक रात हिम्मत करके उस कमरे का दरवाजा खोला तो अंदर कोई नहीं था, बस एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी थी जो खुद-ब-खुद हिल रही थी। उस पर धूल की परत जमी थी जिस पर किसी छोटे बच्चे के नंगे पैरों के निशान बन रहे थे। अचानक कमरे की खिड़की अपने आप जोर से बंद हो गई और हवा में एक डरावनी फुसफुसाहट गूंजी। मैंने जब पीछे मुड़कर देखना चाहा तो कोई अदृश्य शक्ति ने मेरा गला दबोच लिया और मेरी सांसें रुकने लगीं। किसी तरह मैंने खुद को छुड़ाया और उस घर से बाहर भागा, लेकिन आज भी मुझे लगता है कि वो परछाई मेरा पीछा कर रही है।
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अंधेरे कमरे की खिड़की

एक शहर में एक ऐसा आदमी रहता था जो हमेशा अपनी किस्मत को कोसता रहता था क्योंकि उसे लगता था कि उसके जीवन में सिर्फ अंधेरा और निराशा ही बची है। उसने अपने घर की सभी खिड़कियां हमेशा बंद रखी थीं ताकि बाहर की दुनिया की रोशनी उसे परेशान न करे। एक दिन एक फकीर उसके घर आया और उसने उस आदमी से कहा कि कमरा कितना भी अंधेरा क्यों न हो, एक छोटी सी खिड़की खोलने भर से पूरा कमरा रोशन हो सकता है। आदमी को यह बात अजीब लगी लेकिन उसने प्रयोग के तौर पर अपने कमरे की पुरानी जंग लगी खिड़की को थोड़ा सा खोल दिया। जैसे ही खिड़की खुली, सूरज की सुनहरी किरणें अंदर आईं और कमरे में रखी धूल की परतें साफ चमक उठीं। उसे समझ आ गया कि दुख और निराशा हमारे अपने ही बनाए हुए पहरे हैं, जिन्हें सकारात्मकता की एक किरण से आसानी से दूर किया जा सकता है।
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पुरानी घड़ी का रहस्य

शहर के एक व्यस्त चौराहे पर एक बूढ़ा घड़ीसाज़ रहता था। उसकी दुकान में सैकड़ों पुरानी घड़ियां थीं, जिनकी टिक-टिक की आवाज़ से पूरा कमरा गूंजता रहता था। एक दिन एक निराश युवा उसकी दुकान पर आया और बोला कि उसका जीवन थम सा गया है और वह हर क्षेत्र में असफल हो रहा है। बूढ़े घड़ीसाज़ ने मुस्कुराकर उसे एक बंद पड़ी हुई दीवार घड़ी दिखाई और उसकी सुइयों को आगे घुमाने लगा। उसने समझाया कि जैसे एक घड़ी की सुई कभी रुकती नहीं, चाहे उसका मुख्य हिस्सा खराब ही क्यों न हो जाए, वैसे ही समय का पहिया भी निरंतर चलता रहता है। युवा को अपनी गलती का अहसास हुआ कि उसने अपनी गति धीमी कर दी थी। उसने नए जोश के साथ अपनी असफलताओं को पीछे छोड़ते हुए फिर से मेहनत शुरू कर दी और अपने सपनों को नई उड़ान दी।
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अंधेरे कमरे में जलता हुआ दीया

एक पुराने खंडहर नुमा घर में एक छोटा सा दीया रहता था जो रोज रात को अपनी रोशनी से उस अंधेरे कोने को रोशन करता था। एक दिन हवा के तेज झोंके ने उससे कहा कि तुम अकेले इस बड़े अंधेरे को कभी हरा नहीं सकते, इसलिए तुम्हें बुझ जाना चाहिए। दीया मुस्कुराया और बोला कि मेरा काम बस जलते रहना है, चाहे अंधेरा कितना भी बड़ा क्यों न हो। उसकी इस जिद्द को देखकर आसपास के अन्य छोटे दीये भी हिम्मत जुटाकर जल उठे और पूरा कमरा रोशनी से जगमगा उठा। छोटी सी कोशिश भी बड़ा बदलाव ला सकती है।
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दीवार पर टंगा अधूरा कैनवास

चित्रकला के बड़े-बड़े ख्वाब लेकर शहर आए नमन का कमरा हमेशा रंगों और खाली कैनवास से भरा रहता था। वह एक बेहतरीन चित्रकार था, लेकिन उसकी बनाई पेंटिंग्स में हमेशा किसी अधूरेपन की झलक मिलती थी, जिसे वह खुद भी समझ नहीं पाता था। एक दिन उसकी पड़ोसी रिया ने जब उसका कमरा देखा, तो उसने दीवार पर टंगे एक सफेद और अधूरे कैनवास की तरफ इशारा किया। रिया ने कहा कि इस तस्वीर में रंग तो बहुत हैं, लेकिन इसमें जीवन की धड़कन गायब है। नमन को उसकी बात चुभ भी सकती थी, पर उसने रिया को ही अपना मॉडल बनने का प्रस्ताव दे दिया। अगले कई हफ्तों तक रिया रोज शाम को नमन के कमरे में बैठती और नमन उसके चेहरे के भावों को रंगों में ढालता। जैसे-जैसे कैनवास पर रंग भरते गए, नमन के दिल में रिया के लिए एक अलग ही जगह बनती चली गई। उसने महसूस किया कि उसकी कला को जो अधूरापन खल रहा था, वह दरअसल रिया का ही प्यार था जो अब पूरा हो रहा था। जब वह पेंटिंग पूरी हुई, तो वह सिर्फ एक तस्वीर नहीं बल्कि दोनों के दिलों का आईना बन गई थी। कैनवास के पूरा होते ही नमन ने अपने दिल की बात रिया को कह दी और रिया की मुस्कान ने बिना कुछ कहे सब कुछ स्वीकार कर लिया। अधूरा कैनवास अब उनके मुकम्मल प्यार की निशानी बन चुका था।
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तन्हा रातें

चांदनी रातें भी अब डरावनी सी लगने लगी हैं जब से कोई अपना सपनों में आकर भी मुंह फेर लेता है। कमरा वही है पर दीवारों पर सिर्फ तुम्हारी तन्हाई का पहरा है।
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अंधेरा कमरा

चार दीवारों के बीच खुद को कैद कर लिया, दुनिया की भीड़ से हमने यूं किनारा कर लिया। अब तो अंधेरा ही हमारा हमदर्द बन गया है, उजाले से तो हमने सदियों का नाता तोड़ लिया।
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