पहाड़ की चोटी और संकल्प
रोहन और सोहन दोनों दोस्तों ने हिमालय के एक ऊंचे पहाड़ पर चढ़ने का दृढ़ संकल्प लिया। यात्रा के शुरुआती दिनों में सब कुछ ठीक था, लेकिन जैसे-जैसे वे ऊंचाई पर पहुंचे, ऑक्सीजन की कमी और बर्फीली हवाओं ने उनकी परीक्षा लेनी शुरू कर दी। सोहन ने ठंड और थकान से हार मानकर बीच रास्ते से ही वापस लौटने का फैसला किया। रोहन ने उसे रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन सोहन नहीं माना। रोहन ने अकेले ही आगे बढ़ने का कठिन निर्णय लिया। हर कदम पर उसका शरीर जवाब दे रहा था, लेकिन उसका मानसिक दृढ़ संकल्प उसे आगे खींच रहा था। आखिरकार, कई दिनों के संघर्ष के बाद रोहन पहाड़ की चोटी पर पहुंच गया। वहां से उसने जो सूर्योदय देखा, उसने उसकी सारी थकान मिटा दी। घर लौटकर उसने पाया कि केवल मजबूत इरादे ही नामुमकिन को मुमकिन बना सकते हैं।
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