#प्रेम कहानी
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बंजर ज़मीन पर खिलता गुलाब
“
शहर से दूर उस धूलभरी बंजर ज़मीन पर कोई भी पेड़ उगने की उम्मीद नहीं करता था, सिवाय आलोक के। आलोक एक ऐसा शख्स था जो असंभव को संभव बनाने की जिद रखता था। रोज़ सुबह सूरज उगने से पहले वह पानी की दो बाल्टियाँ लेकर वहाँ पहुँच जाता और उस सूखी मिट्टी को सींचता। लोग उसे पागल कहते, पर उसकी आँखों में एक अजीब सा सपना था। एक दिन उस वीरान रास्ते से गुजरते हुए मीरा की नजर उस पर पड़ी। मीरा एक पर्यावरणविद् थी और उसकी आँखों में भी प्रकृति के प्रति वही अगाध प्रेम था। मीरा ने जब आलोक को अकेले मेहनत करते देखा, तो वह खुद को रोक नहीं पाई और उसकी मदद करने के लिए आगे आ गई। शुरुआत में दोनों के बीच सिर्फ काम को लेकर बातें होती थीं, लेकिन धीरे-धीरे सूखी मिट्टी में पौधे की तरह उनके दिलों में भी भावनाएँ पनपने लगीं। वे दोनों घंटों पौधे लगाने और भविष्य के हरे-भरे जंगलों के सपने देखने लगे। कुछ महीनों की कड़ी मेहनत और दोनों के साझा प्यार का नतीजा यह हुआ कि वह बंजर ज़मीन छोटे-छोटे हरे पौधों से लहलहा उठी। पौधे बड़े हुए और उनमें लाल गुलाब के फूल खिल गए। उस दिन मीरा ने आलोक के हाथ में अपना हाथ रखा और समझ गई कि असली प्यार वही है जो मुश्किलों में भी जीवन सींचना जानता है।
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