गुमशुदा चाबी
रमेश बाबू पिछले दस साल से अपनी पुरानी अलमारी की चाबी तलाश रहे थे। हर कोने को छान मारा, लेकिन चाबी का कहीं अता-पता नहीं था। उस अलमारी में उनके बचपन की यादें और कुछ खास दस्तावेज बंद थे। आज जब वे घर की सफाई कर रहे थे, तो अचानक रसोई के एक पुराने डिब्बे से वह जंक लगी चाबी हाथ लग गई। उनके चेहरे पर खुशी की एक चमक आ गई। उन्होंने तुरंत अलमारी की तरफ कदम बढ़ाया और ताले में चाबी घुमाई। ताला खुल गया और बरसों पुरानी धूल उड़ने लगी। लेकिन जब उन्होंने भीतर झांका, तो उनका दिल बैठ गया। समय के दीमक ने सब कुछ कागजों को कुतर डाला था। जो खजाना वे सहेज कर रखना चाहते थे, वह अब सिर्फ राख और टुकड़ों में बदल चुका था। रमेश बाबू समझ गए कि कुछ चीजें खो जाने के बाद दोबारा मिलने पर भी उनका कोई अर्थ नहीं बचता।
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