Shayari

दर्द शायरी

उदास शामों के लिए ईमानदार पंक्तियाँ।

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तन्हा रातें

रात के सन्नाटे में गूंजती है तेरी आवाजें, हम जागते हैं और दुनिया सो जाती है। कोई तो बताए हमें इस दर्द की दवा यारो, जो हर रोज हमें थोड़ा-थोड़ा मार जाती है।

अधूरा एहसास

तेरी यादों का साया आज भी साथ चलता है, भले ही तू हमारी जिंदगी में अब नहीं रहा। हर एक रास्ते पर तेरा इंतजार करते हैं हम, चाहे इस दिल को सुकून कभी मिला नहीं रहा।

खामोशी की चीख

लफ्ज़ कम पड़ गए हमारे हाल-ए-दिल को कहने में, और लोग समझ बैठे कि हमें कोई गम नहीं। टूट चुके हैं हम अंदर से इस तरह यारो, कि अब रोने के लिए भी आंखें नम नहीं।

वक्त का फेर

वक्त ने सिखा दिया हमें अकेले चलना, अब किसी के आने जाने से फर्क नहीं पड़ता। जख्म इतने गहरे मिले हैं इस जिंदगी से, कि अब किसी मरहम पर भरोसा नहीं होता।

अक्सर ऐसा होता है

महफिल में हंसने की आदत है हमारी पुरानी, वरना अकेले में रोने का हुनर कौन जानता है। जो दर्द छुपा रखा है इस सीने के अंदर, उसे हमारी इन खामोश आंखों से कौन पहचानता है।

ख्वाहिशों का अंत

उमीदों के दीप जलाए थे हमने बहुत मगर, हवा के झोंके ने सब कुछ बुझा दिया। जिसे अपना समझकर उम्र भर चाहा हमने, उसी ने एक पल में हमको पराया कर दिया।

बेनाम शिकवे

अब किसी से भी कोई गिला नहीं बाक़ी, हर एक शख्स ने दिल को दुखाना सीख लिया। हम खुद ही खुद से दूर होते चले गए, जब अपनों ने गैरों जैसा बर्ताव करना सीख लिया।

अंधेरा कमरा

चार दीवारों के बीच खुद को कैद कर लिया, दुनिया की भीड़ से हमने यूं किनारा कर लिया। अब तो अंधेरा ही हमारा हमदर्द बन गया है, उजाले से तो हमने सदियों का नाता तोड़ लिया।

टूटा हुआ तारा

आसमान में एक तारा जो टूटा तो हमने भी मांग ली दुआ, शायद उस टूटने वाले ने हमारी किस्मत ही आज़मा दी हो। हर आरज़ू अब अधूरी सी लगती है, जैसे ज़िंदगी ने कोई शर्त लगा दी हो।

खामोश जुबां

कहने को तो बहुत कुछ था इस दिल में, पर होंठों तक आते-आते अल्फाज़ ही मिट गए। त तड़पते रहे हम किसी अपने की तलाश में, और वे अनजान बनकर हमें देखते रह गए।

पुरानी तस्वीर

धूल से साफ की जब वो पुरानी तस्वीर, आंखों से आंसुओं की बह निकली फिर से नीर। वक्त ने सब कुछ बदल दिया चुपचाप, बस वो बीता हुआ कल रह गया मेरे करीब।

तन्हा समंदर

लहरों से शिकवा करें या साहिल से गिला, यहाँ तो हर कोई अपने ही गम में डूबा मिला। समंदर सा विशाल था सीने में दर्द का समंदर, पर कोई कश्ती हमें थामने ना मिला।

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