तन्हा रातें

तन्हा रातें

“
रात के सन्नाटे में गूंजती है तेरी आवाजें, हम जागते हैं और दुनिया सो जाती है। कोई तो बताए हमें इस दर्द की दवा यारो, जो हर रोज हमें थोड़ा-थोड़ा मार जाती है।
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सन्नाटे की गूंज

रात के सन्नाटे में खुद से बात करते हैं, तेरी यादों के दीये रोज रात जलाते हैं। मिल न सके जो सफर में कभी उम्र भर को, उन्हीं को हम दिल की गहराइयों में चाहते हैं।