#दर्द शायरी
हिन्दी
अक्सर ऐसा होता है
“
महफिल में हंसने की आदत है हमारी पुरानी, वरना अकेले में रोने का हुनर कौन जानता है। जो दर्द छुपा रखा है इस सीने के अंदर, उसे हमारी इन खामोश आंखों से कौन पहचानता है।
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