#दर्द शायरी
हिन्दी
बिखरे सपने
“
सजाए थे जो ख्वाब हमने खुली आंखों से कभी,
वो आज आंसुओं की मानिंद पलकों पर ठहर गए।
वो आज आंसुओं की मानिंद पलकों पर ठहर गए।
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