अधूरी कुर्सी

अधूरी कुर्सी

“
मेज़ पर दो कप थे,
एक ठंडा हो गया और बात अधूरी रह गई।
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धड़कनों की भाषा

तुम्हारी एक मुस्कान से संवर जाती है दुनिया मेरी, तुम पास न होकर भी हर पल साथ लगते हो। आँखों में तेरी छुप जाते हैं सारे ख़्वाब मेरे, तुम दिल से निकले वो खूबसूरत एहसास लगते हो।

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