Shayari

दर्द शायरी

उदास शामों के लिए ईमानदार पंक्तियाँ।

📖 50 रचनाएँ

बदलता मौसम

हवा के रुख ने भी आज हमें बदल दिया, जो कभी अपने थे उन्होंने चेहरा मोड़ लिया। मौसम की तरह लोग भी रंग बदलते हैं, इस बात का तजुर्बा हमें आज हो गया।

अधूरी शाम

सूरज ढलते ही फिर से तेरी याद आ गई, बुझते दीये ने जैसे कोई कहानी सुना दी। हम तो बैठे थे यूं ही तन्हाई में, पर तेरी कमी ने रात और लंबी बना दी।

आंसुओं की स्याही

कागज पर जब भी दर्द उतारने की कोशिश की, कलम खुद-ब-खुद आंसुओं से भीग गई। अल्फाज़ तो बहुत थे कहने को मगर, खामोशी हमारी हर बात कह गई।

अंजान रास्ते

कदमों ने जिन राहों पर चलना छोड़ दिया, आज उन पर ही तन्हा भटकना पड़ रहा है। मंज़िल का तो पता नहीं ऐ दोस्त, बस सफर का हर मोड़ डरा रहा है।

कांच के टुकड़े

बिखरे हुए कांच को समेटने चले थे हम, हर एक टुकड़े पर तेरा ही नाम लिखा मिला। जख्मों की गिनती भूल गए इस सफर में, बस दर्द का हर एक लम्हा हमें अपना सा लगा।

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बेवफा मौसम

मौसम की तरह लोग यहां रंग बदलते हैं, पलभर में अपनों को गैरों सा करते हैं। हमने तो सिर्फ मोहब्बत की थी सच्चे दिल से, पर उन्हें हमारे आंसुओं से भी कहां फर्क पड़ते हैं।