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सफर का अनजाना साथी

ट्रेन की खड़खड़ाहट के बीच, सामने वाली सीट पर बैठी वृद्ध महिला ने चुपचाप मुझे एक भुना हुआ चना बढ़ाया। शुरुआत में मैंने संकोच किया, पर उनकी आंखों की ममता ने मुझे वह लेने पर मजबूर कर दिया। बातों का सिलसिला शुरू हुआ और उन्होंने अपनी जिंदगी के कई अनकहे पन्ने खोल दिए। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अपने सपनों को मारकर अपने बच्चों को पाला, और आज सब अपनी दुनिया में व्यस्त हैं। उनके चेहरे पर कोई शिकवा नहीं था, बस एक सुकून था। अचानक रेलवे स्टेशन आया और उन्हें उतरना था। जाते-जाते उन्होंने मेरा हाथ थामा और बोलीं कि हर अजनबी में अपनापन तलाशना ही जीवन का असली सफर है। वह ट्रेन से उतर गईं, पर उनके शब्द मेरे दिल में हमेशा के लिए बस गए।

अनंत आकाश और नन्हा पक्षी

घने जंगल के एक ऊंचे पेड़ पर चीकू नाम का नन्हा पक्षी रहता था। उसे उड़ने से बहुत डर लगता था क्योंकि उसने कभी ऊंचे आसमान को पार नहीं किया था। उसके बाकी साथी रोज बादलों के पार उड़ान भरते, और वह नीचे बैठकर उन्हें देखता रहता था। एक दिन जंगल में अचानक आग लग गई और उसका पेड़ खतरे में आ गया। जान बचाने के लिए चीकू के पास उड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उसने अपने पंख फैलाए और डर को पीछे छोड़कर आसमान में छलांग लगा दी। उस दिन उसे समझ आया कि डर सिर्फ मन का वहम है, और पंखों में आसमान को नापने की ताकत हमेशा से छिपी होती है।

सच्चे दोस्त की परीक्षा

एक शांत वन में रोहन और सोहन नाम के दो गहरे मित्र रहते थे। दोनों हर संकट में एक-दूसरे का साथ निभाने की कसमें खाते थे। एक बार वे दोनों लंबी यात्रा पर निकले। रास्ते में अचानक एक भूखा भालू उनकी तरफ आ गया। रोहन बिना सोचे-समझे तुरंत पास के एक ऊंचे पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन सोहन को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था। सोहन ने जमीन पर लेटकर अपनी सांसें रोक लीं, क्योंकि उसने सुन रखा था कि भालू मरे हुए इंसानों को नहीं खाता। भालू सोहन के पास आया, सूंघा और चला गया। जब संकट टला, तो रोहन पेड़ से उतरा और हँसते हुए पूछा कि भालू ने उसके कान में क्या कहा। सोहन ने दुखी मन से उत्तर दिया कि भालू ने कहा सच्चा मित्र वही है जो संकट के समय अपने साथी का साथ कभी नहीं छोड़ता। इस घटना ने रोहन को उसकी गलती का अहसास कराया।

धूप की छांव

जिंदगी की धूप में तुम मेरे लिए ठंडी छांव जैसे हो, थक जाऊं जब कभी तो तुम्हारा कंधा मेरा आशियाना बन जाता है।

सफर का साथी

जिंदगी के इस सफर में अजनबी मिले बहुत, पर कुछ लोग ऐसे थे जो दिल में उतर गए। राहें बदल गई तो क्या हुआ यारो, उनके दिए हुए जख्म भी अब हुनर बन गए।

तन्हाई का साथी

अंधेरी रातों में उम्मीद का दिया जलाता है, मेरा यार हर गम को मुझसे दूर भगाता है। खुदा से क्या मांगूं मैं इसके सिवा, यह दोस्त हर दुआ में याद आता है।