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रंगों की नई पहचान

चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए राहुल ने कई महीनों तक मेहनत की थी। जब परिणाम आया, तो उसे कोई पुरस्कार नहीं मिला। वह बहुत निराश हुआ और उसने अपने सारे रंग और ब्रश एक कोने में रख दिए। तभी उसकी छोटी बहन उसके पास आई और उसने उन रंगों से एक बेतरतीब सी पेंटिंग बनाई, जिसमें कोई नियम नहीं था लेकिन बहुत सारे जीवंत रंग थे। उसने राहुल से कहा कि कला नियमों में बंधने के लिए नहीं, बल्कि दिल की भावनाएं व्यक्त करने के लिए होती है। बहन की इस बात ने राहुल की आँखें खोल दीं। उसने अगले साल फिर से नए जोश के साथ हिस्सा लिया और इस बार उसने प्रथम पुरस्कार जीता।
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लोभी व्यापारी और जादुई पेड़

एक छोटे से गाँव में मदन नाम का एक लालची व्यापारी रहता था। उसके पास धन की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसकी तृष्णा कभी शांत नहीं होती थी। एक दिन जंगल में घूमते हुए उसे एक अद्भुत फलदार पेड़ मिला, जिसके पत्ते सोने के थे। पेड़ ने कहा कि वह एक दिन में केवल तीन पत्ते ही ले सकता है। मदन ने पहले तो नियम का पालन किया, पर अगले ही दिन उसका लालच बढ़ गया। उसने एक साथ सारे पत्ते तोड़ने की कोशिश की। जैसे ही उसने पेड़ को झटका दिया, सारे सोने के पत्ते मिट्टी में बदलकर राख हो गए और पेड़ हमेशा के लिए अदृश्य हो गया। मदन हाथ मलता रह गया। इस घटना ने उसे सिखाया कि अत्यधिक लालच मनुष्य को सब कुछ खोने पर मजबूर कर देता है और संतोष ही जीवन का असली धन है।
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लालच का अंतिम् परिणाम

एक छोटे से गाँव में सोहन नाम का एक गरीब किसान रहता था। वह अपनी मेहनत से जो भी कमाता था, उससे संतुष्ट रहता था। एक दिन उसे खेत में काम करते समय एक चमकीला पत्थर मिला, जो कोई साधारण पत्थर नहीं बल्कि एक जादुई मणिका था। सोहन उस मणिका को पाकर बहुत अमीर बनने के सपने देखने लगा। उसने दूसरों की मदद करना छोड़ दिया और सिर्फ और सिर्फ धन जमा करने की धुन में लग गया। धीरे-धीरे उसका स्वभाव पूरी तरह बदल गया और वह अपनों से भी दूर हो गया। एक दिन वह मणिका अचानक गायब हो गई और सोहन के पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचा। उसे समझ आ गया कि जो लोग लालच के रास्ते पर चलते हैं, वे अंत में सब कुछ खो देते हैं।
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घमंड का परिणाम

घने जंगल में एक बहुत ही तेज दौड़ने वाला हिरण रहता था। उसे अपनी गति पर बड़ा घमंड था। वह अक्सर कछुए और अन्य धीमे जीवों का मजाक उड़ाया करता था। एक दिन जंगल में एक चुनौती प्रतियोगिता रखी गई। हिरण ने सबसे पहले अपना नाम लिखवाया और कछुए को दौड़ के लिए ललकारा। सभी जानवर इस अनोखी प्रतियोगिता को देखने के लिए एकत्रित हुए। दौड़ शुरू होते ही हिरण हवा से बातें करने लगा और बहुत आगे निकल गया। रास्ते में एक घना पेड़ देखकर उसने सोचा कि कछुए को आने में अभी बहुत देर है, इसलिए थोड़ी देर आराम कर लिया जाए। हिरण पेड़ की छांव में गहरी नींद सो गया। दूसरी ओर कछुआ बिना रुके धीरे-धीरे अपनी चाल से चलता रहा और निर्धारित समय पर फिनिश लाइन तक पहुँच गया। जब हिरण की आँख खुली तो कछुआ जीत चुका था। हिरण का घमंड चूर-चूर हो गया और उसे समझ आ गया कि अहंकार हमेशा पतन की ओर ले जाता है।
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