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हाल की खोजें: दास्तां सन्नाटा
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खोया हुआ रास्ता

रवि ने कभी सोचा नहीं था कि वह अपने ही शहर में कभी रास्ता भटक जाएगा। रोज़मर्रा की भागदौड़ से दूर वह एक दिन अनजाने में पुराने बाजार की तंग गलियों में निकल आया। जहाँ कभी रौनक हुआ करती थी, आज वहाँ सन्नाटा पसरा था और पुरानी इमारतें अपनी दास्तां खुद बयां कर रही थीं। चलते-चलते वह एक अजीब सी हवेली के सामने आ रुका जिसके दरवाजे पर धूल की मोटी परत जमी थी। अचानक उसे भीतर से किसी की गुनगुनाने की आवाज़ सुनाई दी। जैसे ही उसने अंदर झांका, उसे अपना बचपन याद आ गया जब वह अपने दादाजी के साथ इसी इलाके में आया करता था। उस एक पल ने उसके दिल की सारी उलझनें सुलझा दीं और उसे अहसास हुआ कि रफ्तार भरी जिंदगी में उसने अपनी असल जड़ें छोड़ दी थीं।

रेलवे स्टेशन का आखिरी डिब्बा

सांध्यकालीन वेला में जब स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन की सीटी गूंजी, तो राधिका की धड़कनें तेज हो गईं। वह पिछले पाँच सालों से इस प्लेटफार्म पर कबीर का इंतज़ार कर रही थी। कबीर एक चित्रकार था जो कला की तलाश में शहर छोड़कर किसी दूर पहाड़ी वादी में बस गया था। दोनों के बीच कभी कोई वादा नहीं हुआ था, बस एक मौन समझौता था कि एक दिन सफर यहीं आकर थमेगा। ट्रेन रुकी और भीड़ के बीच से एक शख्स बाहर निकला, जिसके कंधे पर वही पुराना भूरा झोला था। कबीर ने जब राधिका को देखा, तो उसके चेहरे पर बरसों पुरानी थकान एक पल में गायब हो गई। उसने अपनी जेब से एक छोटी सी डायरी निकाली, जिसके पन्नों पर राधिका के अनदेखे चित्र उकेरे हुए थे। उस शाम हवा में पुरानी यादों की महक थी और दोनों की नम आँखें बिना कुछ कहे सब कुछ कह रही थीं। जीवन के इस सफर में अब कोई बिछड़ने का डर नहीं बचा था, क्योंकि मंजिल खुद उनके सामने आकर खड़ी हो गई थी।

कांच के बक्से में बंद गुलाब

कॉलेज के आखिरी दिन विदाई समारोह के दौरान राहुल ने मुझे एक कांच के बक्से में बंद लाल गुलाब तोहफे में दिया था। उस समय मुझे लगा कि यह सिर्फ एक औपचारिक विदाई का तोहफा है, लेकिन उस गुलाब की महक ने मेरे दिल में कुछ अलग ही हलचल पैदा कर दी थी। सालों बीत गए, हम दोनों अलग शहरों में अपनी नौकरियां करने लगे और संपर्क भी लगभग टूट गया था। एक दिन अचानक एक कैफे में राहुल बिल्कुल वैसे ही मुस्कुराते हुए सामने आ गया जैसे कॉलेज के दिनों में आता था। उसने वही कांच का बक्सा मुझे दिखाया जिसे उसने आज तक संभाल कर रखा था। उस पल मुझे महसूस हुआ कि दूरियां भले ही बढ़ गई हों, लेकिन दिलों की गहराई में छिपा प्यार कभी कम नहीं होता।

समुद्र की लहरें और सीपियों की खनक

समुद्र के शांत तट पर लहरें बार-बार आकर रेत पर लिखे नामों को मिटा रही थीं और रोहन चुपचाप बैठकर सीपियाँ बीन रहा था। तभी पास ही तान्या अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी और एक तेज़ हवा के झोंके से उसके कागज़ उड़कर रोहन के पास आ गए। जब रोहन ने कागज़ वापस किए तो उसने देखा कि उस पर समुद्र और प्रेम पर बहुत सुंदर कविताएँ लिखी थीं। दोनों की रुचि जब साहित्य और प्रकृति में मिली तो तट पर बिताया जाने वाला हर पल खास बन गया। लहरों के संगीत के बीच उन्होंने अपने दिल की बात एक दूसरे से कह दी और सीपियों में अपना भविष्य तलाशने लगे। अब वे दोनों हर शाम उसी तट पर मिलते हैं जहाँ लहरें उनके प्यार की दास्तां को हमेशा के लिए अमर कर देती हैं।

अधूरी दास्तां

किताबों के पन्नों में आज भी वो सूखा हुआ गुलाब महकता है, जो कभी किसी ने बड़े प्यार से दिया था। वक्त बदल गया पर इस दिल का हाल आज भी वहीं अटका है।

अश्कों की दास्तां

रात भर जागकर हमने अपने ही ख्वाब जलाए हैं, तुम्हारी बेवफाई के चर्चे अब हर गली सुनाए हैं। संभल जाना तुम भी इस फरेबी दुनिया में, हमने तो बस अपनों से ही जख्म खाए हैं।