#दर्द शायरी
हिन्दी
कागज़ के पन्ने
“
लिखी थी जो दास्तां हमने मोहब्बत के नाम से,
आज वही पन्ने भीग गए हमारे ही सलाम से।
आज वही पन्ने भीग गए हमारे ही सलाम से।
👁️ 1 बार पढ़ा गया
❤️ लोगों ने पसंद किया
टिप्पणियाँ
अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।
लॉगिन करके टिप्पणी करें। प्रकाशित होने से पहले हर टिप्पणी की समीक्षा होती है।