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कुल 1085 परिणाम मिले खोज शब्द: ना

वक्त का फेर

वक्त ने सिखा दिया हमें अकेले चलना, अब किसी के आने जाने से फर्क नहीं पड़ता। जख्म इतने गहरे मिले हैं इस जिंदगी से, कि अब किसी मरहम पर भरोसा नहीं होता।
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तन्हा रातें

रात के सन्नाटे में गूंजती है तेरी आवाजें, हम जागते हैं और दुनिया सो जाती है। कोई तो बताए हमें इस दर्द की दवा यारो, जो हर रोज हमें थोड़ा-थोड़ा मार जाती है।
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किस्मत के खेल

लिखी थी जो तकदीर में हमारे जुदाई, उसे मिटाने की कोशिशें तमाम कर लीं। मगर जो लकीरें हाथों में नहीं थीं हमारी, उन्हें पाने की चाहत में अपनी शामें बदनाम कर लीं।
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बेनाम शिकवे

अब किसी से भी कोई गिला नहीं बाक़ी, हर एक शख्स ने दिल को दुखाना सीख लिया। हम खुद ही खुद से दूर होते चले गए, जब अपनों ने गैरों जैसा बर्ताव करना सीख लिया।
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ख्वाहिशों का अंत

उमीदों के दीप जलाए थे हमने बहुत मगर, हवा के झोंके ने सब कुछ बुझा दिया। जिसे अपना समझकर उम्र भर चाहा हमने, उसी ने एक पल में हमको पराया कर दिया।
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तन्हा समंदर

लहरों से शिकवा करें या साहिल से गिला, यहाँ तो हर कोई अपने ही गम में डूबा मिला। समंदर सा विशाल था सीने में दर्द का समंदर, पर कोई कश्ती हमें थामने ना मिला।
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अंधेरा कमरा

चार दीवारों के बीच खुद को कैद कर लिया, दुनिया की भीड़ से हमने यूं किनारा कर लिया। अब तो अंधेरा ही हमारा हमदर्द बन गया है, उजाले से तो हमने सदियों का नाता तोड़ लिया।
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कांच के टुकड़े

बिखरे हुए कांच को समेटने चले थे हम, हर एक टुकड़े पर तेरा ही नाम लिखा मिला। जख्मों की गिनती भूल गए इस सफर में, बस दर्द का हर एक लम्हा हमें अपना सा लगा।
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अंजान रास्ते

कदमों ने जिन राहों पर चलना छोड़ दिया, आज उन पर ही तन्हा भटकना पड़ रहा है। मंज़िल का तो पता नहीं ऐ दोस्त, बस सफर का हर मोड़ डरा रहा है।
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अधूरी शाम

सूरज ढलते ही फिर से तेरी याद आ गई, बुझते दीये ने जैसे कोई कहानी सुना दी। हम तो बैठे थे यूं ही तन्हाई में, पर तेरी कमी ने रात और लंबी बना दी।
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