#दर्द शायरी
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किस्मत के खेल
“
लिखी थी जो तकदीर में हमारे जुदाई, उसे मिटाने की कोशिशें तमाम कर लीं। मगर जो लकीरें हाथों में नहीं थीं हमारी, उन्हें पाने की चाहत में अपनी शामें बदनाम कर लीं।
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