अधूरी शाम

अधूरी शाम

“
सूरज ढलते ही फिर से तेरी याद आ गई, बुझते दीये ने जैसे कोई कहानी सुना दी। हम तो बैठे थे यूं ही तन्हाई में, पर तेरी कमी ने रात और लंबी बना दी।
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