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कुल 77 परिणाम मिले खोज शब्द: डर

बांटने से बढ़ती है ख़ुशी

एक समृद्ध नगर में रमन नाम का एक व्यापारी रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन वह स्वभाव से बहुत कंजूस था। वह किसी भी गरीब को एक फूटी कौड़ी भी नहीं देता था। एक बार नगर में भयानक सूखा पड़ा, जिससे लोग भूखों मरने लगे। रमन ने अपने तहखाने में अनाज का भारी भंडार छुपा लिया ताकि कोई मांग न सके। कुछ दिनों बाद रमन को एक गंभीर बीमारी हो गई और उसके सपने में एक फरिश्ता आया। फरिश्ता ने कहा कि जो धन तूने सिर्फ अपने लिए जोड़ा है, वह तेरी आत्मा को सुखा रहा है। डर के मारे रमन ने अगले ही दिन अपना सारा अनाज गरीबों में बांटना शुरू कर दिया। जैसे ही उसने भूखों को खाना खिलाया, उसके मन में एक असीम शांति और प्रसन्नता का अनुभव हुआ। उसकी तबियत भी धीरे-धीरे ठीक होने लगी। रमन को समझ आ गया कि सच्चा सुख धन जमा करने में नहीं, बल्कि उसे जरूरतमंदों के साथ बांटने में है।
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रेलवे स्टेशन का आखिरी डिब्बा

सांध्यकालीन वेला में जब स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन की सीटी गूंजी, तो राधिका की धड़कनें तेज हो गईं। वह पिछले पाँच सालों से इस प्लेटफार्म पर कबीर का इंतज़ार कर रही थी। कबीर एक चित्रकार था जो कला की तलाश में शहर छोड़कर किसी दूर पहाड़ी वादी में बस गया था। दोनों के बीच कभी कोई वादा नहीं हुआ था, बस एक मौन समझौता था कि एक दिन सफर यहीं आकर थमेगा। ट्रेन रुकी और भीड़ के बीच से एक शख्स बाहर निकला, जिसके कंधे पर वही पुराना भूरा झोला था। कबीर ने जब राधिका को देखा, तो उसके चेहरे पर बरसों पुरानी थकान एक पल में गायब हो गई। उसने अपनी जेब से एक छोटी सी डायरी निकाली, जिसके पन्नों पर राधिका के अनदेखे चित्र उकेरे हुए थे। उस शाम हवा में पुरानी यादों की महक थी और दोनों की नम आँखें बिना कुछ कहे सब कुछ कह रही थीं। जीवन के इस सफर में अब कोई बिछड़ने का डर नहीं बचा था, क्योंकि मंजिल खुद उनके सामने आकर खड़ी हो गई थी।
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संगीत के सुरों में सजा इकरार

संगीत अकादमी के रियाज कक्ष में हमेशा साजिंदों की गूंज रहती थी। मुझे बांसुरी बजाने का शौक था और आरोही को शास्त्रीय गायन का। हम दोनों अक्सर अपनी धुनें एक-दूसरे को सुनाते थे। एक दिन अकादमी के वार्षिक उत्सव से ठीक पहले मेरा बांसुरी अचानक टूट गया और मैं घबरा गई। आरोही ने आगे बढ़कर अपनी धुन से मेरा साथ दिया और उस दिन का कार्यक्रम बेहद सफल रहा। मंच पर जब तालियों की गड़गड़ाहट गूंज रही थी, तब उसने मेरे कान में धीरे से कुछ ऐसा कहा जिसने मेरे सारे डर दूर कर दिए। उस संगीत के मंच पर हमारे सुरों के साथ-साथ हमारे दिल भी हमेशा के लिए एक हो गए।
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दीवार पर टंगा अधूरा चित्र

चित्रकला की उस पुरानी कक्षा में रोहन और आद्या अक्सर साथ बैठते थे। रोहन को प्राकृतिक दृश्यों से प्यार था और आद्या पोर्ट्रेट्स बनाती थी। दोनों महीनों से एक कैनवास पर काम कर रहे थे लेकिन वह हमेशा अधूरा रह जाता क्योंकि दोनों में से कोई भी उस पर आखिरी ब्रश का स्ट्रोक नहीं लगाना चाहता था। उन्हें डर था कि चित्र पूरा होने का मतलब इस बहाने का खत्म होना होगा। एक दिन रोहन ने हिम्मत करके आद्या का चेहरा उस कैनवास के बीचों-बीच उकेर दिया और नीचे लिख दिया कि उसका सबसे खूबसूरत आर्त तो सामने ही बैठा है। आद्या ने मुस्कुराकर ब्रश उठाया और रोहन के हस्ताक्षर के पास अपना नाम भी जोड़ दिया। वह अधूरा चित्र अब उनकी पूरी जिंदगी का पहला पन्ना बन चुका था।
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रंगों का बंधन

होस्टेल के उस कमरे में रंगों की खुशबू फैली हुई थी और हर तरफ गुलाल बिखरा हुआ था। अनमोल इस बात से डरता था कि कोई उसके करीब आकर उसे रंग न लगा दे, क्योंकि वह भीड़ से दूर रहना पसंद करता था। तभी नयना हाथ में नीले और गुलाबी रंग की थाली लेकर तेजी से कमरे में घुसी और सीधे अनमोल के गालों पर रंग मल दिया। अनमोल ने चौंककर देखा तो सामने नयना की खिलखिलाती हुई हँसी थी, जिसमें किसी प्रकार का कोई छल नहीं था। उस दिन रंगों की आड़ में अनमोल के दिल की वो हिचक हमेशा के लिए खत्म हो गई जो वह वर्षों से छुपाए बैठा था। होली के उस जीवंत उत्सव ने दोनों की दुनिया को एक नए और रंगीन रिश्ते में पिरो दिया, जो सातों जन्मों तक रहने का वादा कर गया।
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