बांटने से बढ़ती है ख़ुशी

बांटने से बढ़ती है ख़ुशी

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एक समृद्ध नगर में रमन नाम का एक व्यापारी रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन वह स्वभाव से बहुत कंजूस था। वह किसी भी गरीब को एक फूटी कौड़ी भी नहीं देता था। एक बार नगर में भयानक सूखा पड़ा, जिससे लोग भूखों मरने लगे। रमन ने अपने तहखाने में अनाज का भारी भंडार छुपा लिया ताकि कोई मांग न सके। कुछ दिनों बाद रमन को एक गंभीर बीमारी हो गई और उसके सपने में एक फरिश्ता आया। फरिश्ता ने कहा कि जो धन तूने सिर्फ अपने लिए जोड़ा है, वह तेरी आत्मा को सुखा रहा है। डर के मारे रमन ने अगले ही दिन अपना सारा अनाज गरीबों में बांटना शुरू कर दिया। जैसे ही उसने भूखों को खाना खिलाया, उसके मन में एक असीम शांति और प्रसन्नता का अनुभव हुआ। उसकी तबियत भी धीरे-धीरे ठीक होने लगी। रमन को समझ आ गया कि सच्चा सुख धन जमा करने में नहीं, बल्कि उसे जरूरतमंदों के साथ बांटने में है।
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