पुरानी डायरी और अधूरा खत
बरसों बाद जब अमित ने अपने पुराने बक्से को टटोला, तो उसे कॉलेज के दिनों की एक भूली-बिसरी डायरी मिली। पन्ने पलटते ही एक सूखा हुआ गुलाब और कागज का मुड़ा हुआ टुकड़ा नीचे गिर गया। वह किसी और का नहीं, बल्कि उसकी बचपन की मित्र का लिखा हुआ अंतिम संदेश था, जिसे वह कभी पढ़ नहीं पाया था। उस वक्त की गलतफहमी ने दोनों को हमेशा के लिए अलग कर दिया था। आज उम्र के इस पड़ाव पर जब अतीत की परछाइयां धुंधली हो चुकी हैं, उस खत के हर एक शब्द ने अमित की आंखें नम कर दीं। उसने महसूस किया कि वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता है, सिवाय उन अनकहे एहसासों के जो दिल के किसी कोने में आज भी जिंदा रहते हैं।
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