#प्रेम कहानी
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रेगिस्तान की सुनहरी रेत और दूर क्षितिज
“
धूप में चमकती रेत के समंदर के बीच एक छोटा सा तंबू था जहाँ आरव अपनी मिट्टी की कलाकृतियों को सहेज रहा था। तभी वहाँ मीरा पहुँची जो शहर की भागदौड़ से दूर शांति की तलाश में आई थी। मीरा ने जब एक अधूरे बर्तन को छुआ तो आरव की उंगलियाँ उसके हाथ से टकरा गईं। इस अनचाहे स्पर्श ने दोनों के बीच एक अनोखा सेतु बना दिया जो बिना शब्दों के बहुत कुछ कह रहा था। रेगिस्तान की सर्द रातों में अलाव के पास बैठकर दोनों घंटों बातें करने लगे और एक दूसरे के अधूरेपन को अपनी कला से पूरा करने का संकल्प लिया। समय बीतता गया और जब मीरा के जाने का दिन आया तो आरव ने उसे मिट्टी का एक विशेष दिया भेंट किया जिसमें उनका अनकहा प्रेम समाहित था।
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