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कुल 38 परिणाम मिले खोज शब्द: अनमोल

बगिया का अनमोल रहस्य

एक शांत उपनगर में एक विशाल और बेहद खूबसूरत बगिया थी, जिसकी देखरेख रामू काका करते थे। उस बगिया के फूल पूरे शहर में अपनी खुशबू और सुंदरता के लिए जाने जाते थे। एक दिन शहर का एक अमीर रईस उस बगिया में आया और रामू काका से उनके इस हुनर का रहस्य पूछा। रईस ने कहा कि वह महंगे से महंगे उर्वरक और पानी का उपयोग करता है, फिर भी उसके बगीचे के फूल ऐसे नहीं खिलते। रामू काका ने बड़े ही शांत भाव से उत्तर दिया कि वह पौधों को सिर्फ पानी नहीं देते, बल्कि उनसे प्यार करते हैं। जब भी कोई पौधा मुरझाने लगता है, वह उससे बातें करते हैं और उसकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखते हैं। रईस को समझ आ गया कि केवल धन और संसाधनों से प्रकृति को नहीं जीता जा सकता, उसके लिए निस्वार्थ प्रेम और समर्पण की आवश्यकता होती है। उस दिन से रईस का रवैया बदल गया और उसने भी पौधों से दिल का रिश्ता जोड़ लिया।
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घड़ीसाज का अनमोल सबक

शहर के सबसे पुराने घड़ीसाज की दुकान में हर आकार की घड़ियाँ थीं। एक दिन एक युवा कारीगर ने पूछा कि क्या छोटी सुई बड़ी सुई से कम महत्वपूर्ण है? घड़ीसाज ने उसे समझाया कि हर छोटी और बड़ी पुर्जे का अपना स्थान और महत्व है। यदि एक छोटा सा पेंच भी निकल जाए, तो पूरी घड़ी रुक जाएगी। सफलता किसी बड़े काम से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कार्यों को पूरी ईमानदारी से पूरा करने से मिलती है। युवा को अपनी इस भूल का अहसास हुआ और उसने हर छोटे काम को पूरी तल्लीनता से करना शुरू कर दिया।
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संतोष का अनमोल उपहार

एक छोटे से गाँव में माधव नाम का एक बहुत ही गरीब किसान रहता था जो अपनी छोटी सी झोपड़ी में खुशहाल जीवन बिता रहा था। उसके पास धन-दौलत तो बिल्कुल नहीं थी, लेकिन उसके मन में हमेशा संतोष और शांति का वास रहता था। एक दिन एक धनवान व्यापारी उस गाँव से गुजर रहा था और उसने माधव को बहुत ही आनंदित मुद्रा में गाते हुए देखा। व्यापारी को बड़ा आश्चर्य हुआ कि इतना गरीब इंसान भी इतना खुश कैसे रह सकता है जबकि उसके पास तो खाने के लिए भी पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। व्यापारी ने माधव के पास जाकर उसे सोने के सिक्कों से भरी एक बड़ी थैली दी और कहा कि इन्हें रखो और अपनी गरीबी दूर करो। व्यापारी को लगा कि अब यह गरीब किसान और भी अधिक खुश हो जाएगा और उसका आभार मानेगा। लेकिन सोने के सिक्के मिलने के बाद माधव की रातों की नींद उड़ गई क्योंकि उसे हर वक्त उन सिक्कों के चोरी हो जाने का डर सताने लगा। कुछ दिनों बाद माधव ने वह सोने की थैली वापस व्यापारी को लौटा दी और कहा कि मुझे इस धन की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि मेरा पुराना संतोष ही मेरा सबसे बड़ा खजाना था। व्यापारी हैरान रह गया और उसने यह समझ लिया कि असली सुख पैसों में नहीं बल्कि मन की संतुष्टि में ही निहित होता है।
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संसार का अनमोल रत्न

एक छोटे से गाँव में मदन नाम का एक दयालु व्यक्ति रहता था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए आगे रहता था, लेकिन लोग अक्सर उसकी इस सहजता को उसकी कमजोरी समझ लेते थे और उसका फायदा उठाते थे। एक दिन गाँव में एक अजनबी साधु आया और उसने मदन की परीक्षा लेने की सोची। साधु ने मदन से अपनी अंतिम पूंजी भी मांग ली। बिना एक पल सोचे मदन ने अपना सब कुछ साधु को सौंप दिया। तब साधु अपने असली रूप में आए और बोले कि असली धन तो दूसरों के प्रति दया और प्रेम है जो तुम्हारे पास प्रचुर मात्रा में है। उस दिन से गाँव वालों को भी समझ आ गया कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण होती है।
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बुद्धिमान किसान और सोने का बीज

एक छोटे से गाँव में मदन नाम का एक मेहनती किसान रहता था। वह अपनी फसल को लेकर हमेशा चिंतित रहता था क्योंकि वहाँ अक्सर सूखा पड़ता था। एक दिन गाँव में एक साधु आए और मदन को एक चमकता हुआ बीज देकर बोले कि इसे बोने से कभी अन्न की कमी नहीं होगी। मदन ने खेत में जाकर उस बीज को बहुत संभालकर बोया और रोज उसकी सेवा करने लगा। कुछ महीनों बाद जब फसल तैयार हुई, तो वहाँ कोई सोना नहीं बल्कि असाधारण रूप से मीठे और बड़े फल उगे। मदन निराश होने के बजाय समझ गया कि साधु का सोने का बीज असल में उसकी अपनी कड़ी मेहनत और लगन थी।
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घड़ीसाज़ की दुकान और पुरानी टिक-टिक

शहर के एक कोने में बनी उस छोटी सी घड़ीसाज़ की दुकान में समय जैसे ठहर सा गया था। दीवारों पर टंगी सैंकड़ों घड़ियाँ एक साथ टिक-टिक करती थीं, लेकिन उनकी आवाज़ शोर नहीं बल्कि एक सुकून भरा संगीत लगती थी। रघुकुल बूढ़ा हो चला था और अपनी इस पुश्तैनी दुकान में बैठकर पुरानी घड़ियों को ठीक करना ही उसकी दुनिया थी। एक दिन दुकान के दरवाजे की घंटी बजी और भीतर आई सिमरन, जिसके हाथ में उसके दादाजी की एक बेहद पुरानी और बंद पड़ी घड़ी थी। सिमरन की आँखें नम थीं क्योंकि वह घड़ी उसके लिए किसी अनमोल विरासत से कम नहीं थी। रघुकुल ने चश्मा ठीक किया, घड़ी को अपने हाथ में लिया और मुस्कुराते हुए कहा कि यह ठीक हो जाएगी। अगले कुछ दिनों तक सिमरन रोज शाम को दुकान पर आती और रघुकुल को घड़ियों के पुर्जे जोड़ते हुए देखती। धीरे-धीरे दोनों के बीच खामोश बातचीत का एक सिलसिला शुरू हो गया, जहाँ शब्दों की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। उम्र के फासले होने के बावजूद दोनों के दिल एक ही धड़कन पर चलने लगे थे। जिस दिन वह पुरानी घड़ी ठीक होकर फिर से टिक-टिक करने लगी, सिमरन की खुशी का ठिकाना नहीं था। रघुकुल ने घड़ी उसे थमाते हुए कहा कि समय भले ही आगे बढ़ जाए, लेकिन सच्चे रिश्ते कभी पुराने नहीं होते। सिमरन ने अपनी उँगली रघुकुल के हाथों पर रखी और समझ गई कि जीवन की असली घड़ी अब सही दिशा में चल रही है।
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रंगों का बंधन

होस्टेल के उस कमरे में रंगों की खुशबू फैली हुई थी और हर तरफ गुलाल बिखरा हुआ था। अनमोल इस बात से डरता था कि कोई उसके करीब आकर उसे रंग न लगा दे, क्योंकि वह भीड़ से दूर रहना पसंद करता था। तभी नयना हाथ में नीले और गुलाबी रंग की थाली लेकर तेजी से कमरे में घुसी और सीधे अनमोल के गालों पर रंग मल दिया। अनमोल ने चौंककर देखा तो सामने नयना की खिलखिलाती हुई हँसी थी, जिसमें किसी प्रकार का कोई छल नहीं था। उस दिन रंगों की आड़ में अनमोल के दिल की वो हिचक हमेशा के लिए खत्म हो गई जो वह वर्षों से छुपाए बैठा था। होली के उस जीवंत उत्सव ने दोनों की दुनिया को एक नए और रंगीन रिश्ते में पिरो दिया, जो सातों जन्मों तक रहने का वादा कर गया।
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किताबों की दुकान का कोना

शहर के एक पुराने कोने में बनी उस छोटी सी किताबों की दुकान में रोज शाम को अनमोल और सिमरन की मुलाकात होती थी। दोनों हमेशा एक ही किताब पर हाथ रखते और फिर हंसकर एक-दूसरे को पढ़ने के लिए वह पन्ना सौंप देते थे। कई महीनों तक यह सिलसिला खामोशी से चलता रहा और दोनों के बीच एक अनजाना सा रिश्ता बन गया। एक दिन दुकान के मालिक ने बताया कि यह दुकान अब बंद होने वाली है, जिससे दोनों मायूस हो गए। उस अंतिम शाम को अनमोल ने अपनी जेब से एक अंगूठी निकाली और सिमरन से पूछा कि क्या वह इस किताब के पन्नों से बाहर भी उसकी जिंदगी का हिस्सा बनेगी। सिमरन की आंखों में खुशी के आंसू आ गए और उसने तुरंत हां कह दिया।
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जीवन की अनमोल सीख

वक्त बदलता है तो अपने भी बदल जाते हैं,
सूप में कचरा पीछे और दाने आगे आ जाते हैं।
सफर लंबा है संभल कर चलना मेरे दोस्त,
यहां मतलब के रिश्ते बहुत जल्दी ढल जाते हैं।
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जीवन की बहार

फूलों की तरह तुम भी महकना सीख जाओ, गमों को भुलाकर आगे बढ़ना सीख जाओ। यह जीवन एक अनमोल सा तोहफा सभी को है, इसे प्यार और उमंग से जीना ही तो खजाना है।
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