#नैतिक कहानी
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संतोष का अनमोल उपहार
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एक छोटे से गाँव में माधव नाम का एक बहुत ही गरीब किसान रहता था जो अपनी छोटी सी झोपड़ी में खुशहाल जीवन बिता रहा था। उसके पास धन-दौलत तो बिल्कुल नहीं थी, लेकिन उसके मन में हमेशा संतोष और शांति का वास रहता था। एक दिन एक धनवान व्यापारी उस गाँव से गुजर रहा था और उसने माधव को बहुत ही आनंदित मुद्रा में गाते हुए देखा। व्यापारी को बड़ा आश्चर्य हुआ कि इतना गरीब इंसान भी इतना खुश कैसे रह सकता है जबकि उसके पास तो खाने के लिए भी पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। व्यापारी ने माधव के पास जाकर उसे सोने के सिक्कों से भरी एक बड़ी थैली दी और कहा कि इन्हें रखो और अपनी गरीबी दूर करो। व्यापारी को लगा कि अब यह गरीब किसान और भी अधिक खुश हो जाएगा और उसका आभार मानेगा। लेकिन सोने के सिक्के मिलने के बाद माधव की रातों की नींद उड़ गई क्योंकि उसे हर वक्त उन सिक्कों के चोरी हो जाने का डर सताने लगा। कुछ दिनों बाद माधव ने वह सोने की थैली वापस व्यापारी को लौटा दी और कहा कि मुझे इस धन की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि मेरा पुराना संतोष ही मेरा सबसे बड़ा खजाना था। व्यापारी हैरान रह गया और उसने यह समझ लिया कि असली सुख पैसों में नहीं बल्कि मन की संतुष्टि में ही निहित होता है।
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