श ShayariForYou
🔍 खोज व अनुसंधान

"अनमोल" के लिए परिणाम

हिंदी, उर्दू, हिंग्लिश या अंग्रेज़ी में शायरी, शेर, कवि या भाव खोजें।

कुल 38 परिणाम मिले खोज शब्द: अनमोल

अनोखा उपहार

आज सोहन का जन्मदिन था, लेकिन उसके घर में किसी तरह का कोई जश्न नहीं था। उसके पिता की नौकरी छूट चुकी थी और घर की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक थी। सोहन समझदार था, इसलिए उसने किसी से कोई जिद नहीं की। शाम को जब वह उदास मन से अपने कमरे की खिड़की के पास बैठा था, तब उसके पिता उसके पास आए। उनके हाथ में एक साधारण सा गत्ते का डिब्बा था। सोहन ने जब डिब्बा खोला, तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गई। अंदर कोई महंगा खिलौना नहीं, बल्कि उसके पिता के हाथों से बनाई हुई एक सुंदर लकड़ी की गिटार थी। पिता ने खुद कई रातें जागकर उसे तराशा था। सोहन ने गिटार को गले से लगा लिया। उसे समझ आ गया कि दुनिया के तमाम महंगे उपहारों से कहीं बढ़कर वह अनमोल प्रेम है जो अपनों के त्याग से मिलता है। यह उसके जीवन का सबसे खूबसूरत जन्मदिन बन गया।
👁️ 2

लोहे का संदूक

गाँव के एक पुराने मकान के कोने में धूल फाँकता लोहे का एक भारी संदूक रखा था। रमेशन दादा ने कई दशकों से उसे नहीं खोला था। सब यही मानते थे कि उसमें केवल पुराने कागजात और बेकार का सामान भरा होगा। एक दिन जब घर की मरम्मत का काम शुरू हुआ, तो उस संदूक को हटाना जरूरी हो गया। रमेश ने जब संदूक की जंक लगी चाबी ताले में घुमाई, तो वह अजीब सी आवाज के साथ खुल गया। अंदर कोई खजाना नहीं था, बल्कि बचपन के कुछ धुंधले खिलौने, एक टूटी हुई बाँसुरी और उसकी दिवंगत माँ के हाथ की सिली हुई कुछ सुंदर पोटलियाँ थीं। उन चीजों को देखते ही रमेश के मन में बरसों पुरानी यादों का सैलाब उमड़ पड़ा। वह समझ गया कि असली दौलत सोने-चांदी में नहीं, बल्कि अपनों के छोड़े गए स्पर्श में होती है।
👁️ 0

कागज की नाव

सावन की पहली झमाझम बारिश के बाद नन्हे राहुल ने रंग-बिरंगे कागजों से कई नावें बनाईं। वह दौड़ता हुआ गली के नुक्कड़ पर पहुंचा जहाँ बारिश का पानी एक नाले की तरह बह रहा था। उसने एक-एक करके अपनी सारी नावें पानी में छोड़ दीं। पानी के तेज बहाव में वे नावें आगे बढ़ने लगीं। राहुल ताली बजा-बजाकर खुश हो रहा था। तभी एक बड़ी नाव पानी के भंवर में फंसकर डूबने लगी। राहुल उदास हो गया और सोचने लगा कि कागज की नाव का सफर इतना छोटा क्यों होता है। तभी पास की खिड़की से एक बुजुर्ग महिला ने मुस्कुराते हुए कहा कि बेटा, कागज की नाव का काम सिर्फ सफर का आनंद देना होता है, मंजिल तक पहुंचना नहीं। राहुल उस बात का मतलब तो पूरी तरह नहीं समझ पाया, लेकिन उसके चेहरे पर फिर से एक प्यारी सी मुस्कान आ गई। उसने बची हुई नावों को बहते हुए देखना जारी रखा। उसे अहसास हुआ कि जीवन में हर छोटी चीज का अपना एक अलग महत्व होता है, चाहे वह पल भर के लिए ही क्यों न हो।
👁️ 3

घड़ीसाठ की दुकान

शहर के पुराने बाजार के कोने पर मदन लाल की घड़ियों की एक छोटी सी दुकान थी। लोग उन्हें प्यार से घड़ीसाठ चाचा कहते थे। उनकी दुकान में दीवारों पर टंगी सैकड़ों घड़ियाँ टिक-टिक करती रहती थीं, मानो समय खुद वहाँ आकर ठहर गया हो। मदन लाल हर टूटी हुई घड़ी को बहुत धैर्य से ठीक करते थे। एक दिन एक युवा लड़का अपनी दादाजी की पुरानी और बंद पड़ी घड़ी लेकर उनके पास आया। लड़के ने उदास मन से कहा कि यह अब कभी नहीं चल सकती क्योंकि इसके पूर्जे घिस चुके हैं। मदन लाल ने चश्मा चढ़ाकर घड़ी को ध्यान से देखा, मुस्कुराए और बोले बेटा, समय कभी रुकता नहीं, बस इसे दोबारा सही दिशा में घुमाने की जरूरत होती है। उन्होंने उस घड़ी के अंदर का एक छोटा सा जाम पहिया साफ किया और थोड़ा सा तेल डाला। चंद मिनटों में ही वह बंद घड़ी सुई हिलाने लगी और टिक-टिक की आवाज गूंज उठी। लड़के की आंखें चमक उठीं और उसे जीवन का एक नया सबक मिल गया कि मुश्किलें कितनी भी पुरानी हों, सुधार की गु हमेशा रहती है।
👁️ 0

अटेरे में रखी धूल भरी ट्रंक

जब रोहन ने अपने पुरखों के घर की सफाई शुरू की, तो अटारी के एक कोने में उसे लोहे की भारी ट्रंक मिली। उस पर समय की धूल और जंग की परतें जमी हुई थीं। बड़ी मुश्किल से जब उसने उसका ताला खोला, तो अंदर बचपन की कई अनमोल चीजें और उसकी माँ की साड़ियां रखी मिलीं। साड़ियों की तहों के बीच से एक लिफाफा गिरा जिस पर रोहन का नाम लिखा था। वह खत उसकी माँ ने उसके बोर्ड परीक्षा के दिनों में लिखा था, जिसमें उसकी सफलता के लिए दुआएं और अगाध प्रेम था। उस खत को पढ़ते ही रोहन की आँखों से आंसू बह निकले। वह समझ गया कि माँ भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद आज भी उसके साथ है। इस अनपेक्षित उपहार ने उसके भीतर एक अजीब सी शांति भर दी और उसने ट्रंक की हर चीज़ को सीने से लगा लिया।
👁️ 1

सफर का अनजाना साथी

ट्रेन की खड़खड़ाहट के बीच, सामने वाली सीट पर बैठी वृद्ध महिला ने चुपचाप मुझे एक भुना हुआ चना बढ़ाया। शुरुआत में मैंने संकोच किया, पर उनकी आंखों की ममता ने मुझे वह लेने पर मजबूर कर दिया। बातों का सिलसिला शुरू हुआ और उन्होंने अपनी जिंदगी के कई अनकहे पन्ने खोल दिए। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अपने सपनों को मारकर अपने बच्चों को पाला, और आज सब अपनी दुनिया में व्यस्त हैं। उनके चेहरे पर कोई शिकवा नहीं था, बस एक सुकून था। अचानक रेलवे स्टेशन आया और उन्हें उतरना था। जाते-जाते उन्होंने मेरा हाथ थामा और बोलीं कि हर अजनबी में अपनापन तलाशना ही जीवन का असली सफर है। वह ट्रेन से उतर गईं, पर उनके शब्द मेरे दिल में हमेशा के लिए बस गए।
👁️ 1

अल्मारी के कोने में रखी पुरानी घड़ी

दीपावली की सफाई के दौरान जब अनाहिता ने घर के पुराने स्टोर रूम की सफाई शुरू की, तो उसकी नजर लकड़ी की एक पुरानी संदूकची पर पड़ी। उसने धूल झाड़कर उसे खोला तो अंदर उसके दादाजी की कलाई पर बंधने वाली वह पुरानी टिक-टिक करती घड़ी मिली, जो सालों पहले बंद हो गई थी। अनाहिता ने उसे उठाया और जैसे ही उसने उसकी चाबी घुमाने की कोशिश की, अचानक से घड़ी की सुइयां हिलने लगीं और उसकी पुरानी टिक-टिक की आवाज गूंज उठी। उस आवाज के साथ ही बचपन की वे तमाम यादें ताजा हो गईं जब दादाजी उसे पार्क ले जाया करते थे और अपनी कलाई की घड़ी दिखाकर उससे समय पूछा करते थे। अनाहिता की पलकें नम हो गईं और उसने घड़ी को अपने सीने से लगा लिया। उस एक पल में बीता हुआ पूरा बचपन जैसे फिर से लौट आया हो।
👁️ 1

पुरानी बक्से में रखी डायरी

अमित को अपने दादाजी की अलमारी के कोने में एक बहुत पुरानी और धूल से भरी डायरी मिली। जब उसने उसे खोला, तो उसने पाया कि उसके दादाजी ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों में कितनी असफलताएँ झेली थीं। हर पन्ने पर असफलता के बाद किए गए नए प्रयोगों और कभी हार न मानने वाले संकल्प की एक लंबी दास्तान लिखी हुई थी। अमित खुद अपने जीवन में एक बड़े व्यापारिक घाटे के बाद पूरी तरह से टूट चुका था और घर बैठकर निराशा में अपना समय बिता रहा था। उसने जब उन पन्नों को ध्यान से पढ़ा, तो उसे महसूस हुआ कि उसके दादाजी ने उससे भी कहीं अधिक कठिन समय का सामना किया था। उस डायरी के शब्दों ने अमित के अंदर एक नई ऊर्जा और काम करने की एक अजीब सी ललक जगा दी। उसने अपनी पुरानी गलतियों से सबक लिया और नए सिरे से अपने काम की शुरुआत करने का पक्का निर्णय कर लिया। कुछ ही महीनों की कड़ी मेहनत और अटूट लगन के बाद, उसका व्यापार फिर से चमक उठा और वह अपनी मंजिल पा गया।
👁️ 2

पत्थर की खदान और हीरा

एक पुरानी पत्थर की खदान में सोहन नाम का मजदूर वर्षों से मेहनत कर रहा था। हर दिन वह सुबह से शाम तक भारी पत्थरों को तोड़ा करता था। लोग कहते थे कि यहाँ केवल साधारण पत्थर के अलावा कुछ नहीं मिलेगा, इसलिए इतनी मेहनत करना बेकार है। सोहन ने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया और अपनी लगن से काम करता रहा। एक दोपहर, जब उसने एक खास चट्टान पर हथौड़ा मारा, तो उसमें से एक अनमोल चमकीला पत्थर निकला, जिसकी कीमत ने उसकी पूरी जिंदगी बदल दी। इस चमत्कार ने साबित कर दिया कि निरंतर प्रयास और धैर्य ही इंसान की तकदीर बदलते हैं।
👁️ 3

समुद्र तट पर बिखरे सीप

सुबह की ठंडी हवा में एक बूढ़ा व्यक्ति समुद्र तट पर टहल रहा था और रेत पर बिखरे सीपों को ध्यान से देख रहा था। उसके साथ चल रहा युवा पोता यह सब देखकर हैरान था कि दादाजी हर साधारण सीप को उठाकर क्यों देख रहे हैं। तभी दादाजी को एक ऐसा सीप मिला जिसके भीतर एक चमकता हुआ मोती था, जिसे देखकर दोनों की आँखें खुशी से चमक उठीं। दादाजी ने पोते को बताया कि जैसे समुद्र की लहरें हर सीप को कीमती नहीं बनातीं, वैसे ही जीवन के थपेड़े हमें मजबूत और अनमोल बनाते हैं। इस सीख ने युवक की सोच को पूरी तरह बदल दिया और उसने अपने कठिन दिनों को एक अवसर के रूप में देखना शुरू कर दिया।
👁️ 1

एक साधारण दीपक का संकल्प

अंधेरे कमरे के एक कोने में रखे छोटे से मिट्टी के दीपक ने एक रात आसमान के तारों से कहा कि तुम बहुत भाग्यशाली हो जो पूरे ब्रह्मांड को रोशन करते हो। मेरा प्रकाश तो केवल इस छोटे से कमरे के एक कोने तक ही सीमित है। तब एक समझदार तारे ने मुस्कुराते हुए कहा कि तुम्हारा सोचना गलत है। हम आसमान में जरूर हैं, लेकिन किसी के अंधेरे को दूर नहीं कर सकते। तुम्हारी एक छोटी सी लौ इस पूरे कमरे के अंधकार को मिटाने की क्षमता रखती है। तुम छोटे जरूर हो, लेकिन तुम्हारा प्रभाव बहुत बड़ा है। यह सुनकर दीपक का आत्मविश्वास लौट आया और उसने पूरी शिद्दत से जलना शुरू कर दिया। यह कहानी हमें बताती है कि आपका दायरा भले ही छोटा हो, लेकिन आपका योगदान समाज के लिए अनमोल हो सकता है।
👁️ 2

बारिश की बूँद और सीप का भाग्य

समुद्र के भीतर रहने वाली एक साधारण सीप को हमेशा इस बात का बहुत दुख रहता था कि वह बाकी सुंदर जीवों की तरह चमकती नहीं है। एक दिन आसमान में काले बादल छाए और बारिश की कुछ खास नक्षत्र वाली बूँदें समुद्र के पानी में गिरीं। समुद्र के अन्य जीव उन बूँदों से बचने के लिए इधर-उधर छुपने लगे, लेकिन उस साधारण सीप ने अपनी बाहें फैलाकर आसमान से गिरती उस एक बूँद को अपने भीतर थाम लिया। उसने उस बूँद को अपनी पूरी सुरक्षा और प्रेम के साथ अपने अंदर सहेज कर रखा। समय बीतता गया और वक्त के साथ वही साधारण सीप की बूँद एक अमूल्य और चमकदार मोती में बदल गई। इस अद्भुत परिवर्तन ने सबको हैरान कर दिया। यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में मिलने वाले विशेष अवसरों को जो व्यक्ति पहचान कर धैर्य के साथ सही मेहनत करता है, उसकी किस्मत बदल जाती है।
👁️ 3