कांच की खिड़की और बारिश की बूंदें
जब भी झमाझम बारिश होती, नयना अपनी खिड़की के पास बैठकर बाहर देखने लगती। सामने वाले घर की बालकनी में अक्सर कबीर अपनी गिटार के तारों को छेड़ता नजर आता था। दोनों के बीच कभी कोई सीधी बात नहीं हुई थी, बस खिड़कियों से होता हुआ एक खामोश संवाद था। एक दिन बारिश इतनी तेज थी कि बिजली चली गई और दोनों अपनी-अपनी बालकनी में आ गए। मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में कबीर ने गिटार पर वह धुन बजाई जो अक्सर वह नयना को देखते हुए गुनगुनाता था। नयना ने मुस्कुराते हुए अपनी खिड़की से ही एक फूल उसकी तरफ उछाल दिया। उस बारिश की रात ने दोनों के बीच की दूरी को हमेशा के लिए मिटा दिया और एक नए रिश्ते की शुरुआत हुई।
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