#लघु कथाएँ
हिन्दी
आखिरी लालटेन
“
गाँव की आखिरी लालटेन मोहन के दरवाज़े पर जलती थी। बिजली आने के बाद भी वह उसे इसलिए जलाता रहा कि रात को लौटने वाला बेटा दूर से घर पहचान सके। एक शाम बेटा जल्दी आ गया और बोला, अब फ़ोन में रोशनी है। मोहन मुस्कुराया, लालटेन बुझा दी, और पहली बार अँधेरे बरामदे में बेटे के साथ चाय पी।
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