सच्ची मित्रता का मूल्य
एक शांत गांव में दो पक्के मित्र रहते थे, करण और सोहन। दोनों हर सुख-दुःख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते थे। एक बार गांव में भयंकर सूखा पड़ा और लोगों के पास खाने के लाले पड़ गए। सोहन ने अपनी आखिरी बची हुई रोटियां भी करण के परिवार के साथ बांट लीं। कुछ साल बीते और सोहन बुरे समय में फंस गया, तब करण ने बिना एक पल गंवाए उसकी पूरी मदद की। लोगों ने देखा कि कैसे उनकी दोस्ती ने हर मुश्किल को पार कर लिया। इस घटना ने पूरे गांव को सिखाया कि सच्ची मित्रता वही है जो संकट के समय काम आए और कभी स्वार्थ न देखे।
0