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नैतिक कहानी

एक सीख वाली कहानियाँ, उपदेश दिए बिना।

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सच्ची मित्रता का मूल्य

एक शांत गांव में दो पक्के मित्र रहते थे, करण और सोहन। दोनों हर सुख-दुःख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते थे। एक बार गांव में भयंकर सूखा पड़ा और लोगों के पास खाने के लाले पड़ गए। सोहन ने अपनी आखिरी बची हुई रोटियां भी करण के परिवार के साथ बांट लीं। कुछ साल बीते और सोहन बुरे समय में फंस गया, तब करण ने बिना एक पल गंवाए उसकी पूरी मदद की। लोगों ने देखा कि कैसे उनकी दोस्ती ने हर मुश्किल को पार कर लिया। इस घटना ने पूरे गांव को सिखाया कि सच्ची मित्रता वही है जो संकट के समय काम आए और कभी स्वार्थ न देखे।

लोभी बंदर की सीख

एक घने जंगल में एक चंचल बंदर रहता था। एक दिन उसे एक चमकीला और अनोखा कांच का जार मिला जिसके अंदर स्वादिष्ट बादाम रखे थे। बंदर ने जार में हाथ डाला और मुट्ठी में बहुत सारे बादाम भींच लिए। लेकिन जब उसने हाथ बाहर निकालना चाहा, तो बंद मुट्ठी जार के मुँह से बाहर नहीं आ पाई। वह जोर-जोर से खींचने लगा लेकिन जार नहीं छूटा। तभी वहाँ एक समझदार बूढ़ा बंदर आया और बोला कि यदि तुम कुछ बादाम छोड़ दोगे, तो तुम्हारा हाथ आसानी से बाहर आ जाएगा। बंदर ने वैसा ही किया और उसका हाथ तुरंत बाहर आ गया। इस घटना से उसे समझ आया कि अत्यधिक लालच हमेशा मुसीबत का सबब बनता है और संतोष ही सबसे बड़ा धन है।

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इस संग्रह की सबसे पढ़ी रचनाएँ

बड़ों का आशीर्वाद और अनुभव

शहर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में राहुल नाम का एक युवा छात्र पढ़ता था। उसे अपने ज्ञान पर बहुत अभिमान था और वह अपने शिक्षकों व बुजुर्गों की बातों को हमेशा अनसुना कर देता था। उसे लगता था कि आधुनिक युग में पुरानी पीढ़ी के अनुभवों का कोई महत्व नहीं है। एक दिन कॉलेज की तरफ से एक कठिन पर्वतारोहण अभियान का आयोजन किया गया। राहुल अपने घमंड में सबसे आगे निकल गया और अनुभवी गाइड की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया। कुछ ही दूर जाने पर वह एक खतरनाक रास्ते पर फंस गया और बुरी तरह डर गया। तभी वहां गाँव के एक बुजुर्ग चरवाहे ने आकर उसकी जान बचाई और सही रास्ता दिखाया। राहुल को समझ आया किताबी ज्ञान से बड़ा बुजुर्गों का अनुभव होता है।

अनोखा उपहार और सच्ची मुस्कान

सोनू बहुत ही अमीर घराने का बच्चा था जिसे उसके जन्मदिन पर हर साल महंगे खिलौने मिलते थे। इस बार उसने अपने जन्मदिन पर शहर के गरीब बच्चों के साथ अपनी खुशियाँ बांटने का अनोखा फैसला किया। उसने अपनी पुरानी मगर अच्छी किताबें और खिलौने उन जरूरतमंद बच्चों में बांट दिए। जब उसने एक छोटे बच्चे के चेहरे पर अपनी पुरानी खिलौना गाड़ी पाकर खुशी की चमक देखी, तो उसे जो सुकून मिला वह किसी भी नए खिलौने से नहीं मिल सकता था। उस दिन सोनू को समझ आया कि अपनी चीजें बांटने से मिलने वाली खुशी सबसे बड़ी होती है।

चित्रकार और दर्पण

नगर के प्रसिद्ध चित्रकार विक्रम अपनी कला के लिए पूरे राज्य में जाने जाते थे। वह जब भी किसी का चित्र बनाते, तो उसकी खामियों को छिपाकर उसे और भी सुंदर बना देते थे। एक दिन एक गरीब और साधारण दिखने वाला वृद्ध उनके पास आया और अपना चित्र बनवाने की इच्छा जताई। विक्रम ने उसे देखा और सोचा कि इसका चित्र बनाने से कोई ख्याति नहीं मिलेगी, इसलिए उसने जानबूझकर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और एक साधारण सी तस्वीर थमा दी। वृद्ध ने तस्वीर ली और मुस्कुराते हुए कहा कि असली चित्रकार वही है जो बाहरी रूप के साथ-साथ भीतर की सच्चाई को भी कैनवास पर उतार सके। उसने विक्रम को एक जादुई दर्पण दिया जिसमें इंसान का असली चरित्र दिखाई देता था। उस दर्पण में देखने पर विक्रम को अपनी कला का अहंकार साफ नजर आया। उसे अपनी गलती का पछतावा हुआ और उसने कसम खाई कि वह कभी भी किसी इंसान को उसकी बाहरी स्थिति से नहीं आंकेगा।

सूरजमुखी और रात का फूल

एक खूबसूरत बाग में एक सूरजमुखी का पौधा उग आया था, जो दिनभर सूरज की रोशनी की तरफ देखता रहता और उसकी ऊर्जा पाकर बहुत इतराता था। उस बाग के एक कोने में रात के समय खिलने वाला रजनीगंधा का पौधा भी था, जो दिनभर मुरझाया सा रहता था। सूरजमुखी हमेशा उस छोटे पौधे का मजाक उड़ाता और कहता कि तुम्हारी तो कोई चमक ही नहीं है। एक दिन अचानक मौसम बदला और भीषण गर्मी के साथ लू चलने लगी। सूरजमुखी का पौधा जो दिनभर तेज धूप सहता था, धीरे-धीरे झुलसने लगा और उसकी सारी चमक फीकी पड़ गई। तब रात के समय उस रजनीगंधा के पौधे ने अपनी ठंडी और भीनी खुशबू से पूरे बाग को महका दिया और झुलसते हुए सूरजमुखी को शीतलता प्रदान की। तब सूरजमुखी को यह समझ आया कि इस प्रकृति में हर किसी का अपना विशेष समय और महत्व होता है, और किसी की कमजोरी का मजाक उड़ाना हमारी अपनी मूर्खता को दर्शाता है।