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अंधेरे में जलती मशाल

एक दूरदराज के पहाड़ी इलाके में बिजली की कोई सुविधा नहीं थी। सर्दियों की एक ठंडी रात में गाँव के सभी लोग एक बड़े कमरे में जमा हुए और इस बात पर चर्चा करने लगे कि इस अंधेरे से कैसे निपटा जाए। सभी अपनी-अपनी समस्याओं का रोना रो रहे थे कि तभी एक छोटा लड़का अपने हाथ में एक छोटी सी मोमबत्ती लेकर आगे आया। उसने कहा कि दूसरों को कोसने से बेहतर है कि हम खुद एक छोटा सा दिया जलाएं। लोगों ने उसकी बात पर पहले तो हंसी उड़ाई, लेकिन जब उसने अपनी मोमबत्ती से एक बड़ा लालटेन जलाया और उससे पूरे कमरे में रोशनी फैल गई, तो सबकी आँखें खुली की खुली रह गईं। उस लड़के ने सभी को सिखाया कि संकट के समय केवल शिकायत करने से कुछ नहीं होता, बल्कि अपनी क्षमतानुसार छोटा सा प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकता है।
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संसार का अनमोल रत्न

एक छोटे से गाँव में मदन नाम का एक दयालु व्यक्ति रहता था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए आगे रहता था, लेकिन लोग अक्सर उसकी इस सहजता को उसकी कमजोरी समझ लेते थे और उसका फायदा उठाते थे। एक दिन गाँव में एक अजनबी साधु आया और उसने मदन की परीक्षा लेने की सोची। साधु ने मदन से अपनी अंतिम पूंजी भी मांग ली। बिना एक पल सोचे मदन ने अपना सब कुछ साधु को सौंप दिया। तब साधु अपने असली रूप में आए और बोले कि असली धन तो दूसरों के प्रति दया और प्रेम है जो तुम्हारे पास प्रचुर मात्रा में है। उस दिन से गाँव वालों को भी समझ आ गया कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण होती है।
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सच्चा मार्ग और कल्पवृक्ष

एक छोटे से गाँव में सोहन नाम का एक बहुत ही मेहनती युवक रहता था। वह दिन-रात अपने खेतों में कड़ी मेहनत करता था, लेकिन उसकी किस्मत उसका साथ नहीं दे रही थी। एक दिन उसे जंगल में एक जादुई पेड़ मिला, जिसके बारे में कहा जाता था कि वह जो मांगो वही दे देता है। सोहन ने सबसे पहले अपार धन मांगा और कुछ ही पलों में वह अमीर बन गया। धन मिलते ही उसके सारे पुराने दोस्त और रिश्तेदार उससे दूर होने लगे और उसके मन में अहंकार और डर घर कर गया। कुछ समय बाद उसे यह समझ आ गया कि बिना मेहनत के मिला हुआ धन और सुख केवल भ्रम है और इससे इंसान का असली सुकून छिन जाता है। उसने उस वैभव को छोड़कर वापस अपने खेतों की मिट्टी में पसीना बहाना शुरू किया। इस बार उसे वास्तविक शांति और खुशी प्राप्त हुई, क्योंकि उसने समझ लिया कि पक्के परिश्रम से कमाया गया धन ही इंसान का सबसे बड़ा आभूषण होता है और शॉर्टकट कभी भी सच्ची सफलता नहीं दे सकते।
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सच्ची ईमानदारी की कीमत

रमेश शहर के बाजार में एक छोटी सी फलों की दुकान चलाता था। वह बहुत गरीब था लेकिन उसकी ईमानदारी दूर-दूर तक प्रसिद्ध थी। एक दिन एक अमीर व्यापारी उसकी दुकान पर फल खरीदने आया और गलती से मोहरों से भरा एक कीमती थैला वहीं छोड़ गया। रमेश ने जब थैला देखा, तो कुछ पल के लिए उसके मन में लालच आया कि वह इससे अपनी सारी गरीबी दूर कर सकता है। लेकिन उसके संस्कारों ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। उसने अगले दिन व्यापारी को ढूंढकर उसका थैला ससम्मान वापस कर दिया। व्यापारी रमेश की ईमानदारी देखकर बहुत प्रसन्न हुआ और उसे एक बड़ा पुरस्कार दिया। रमेश को पता चल गया कि ईमानदारी ही इंसान की सबसे बड़ी पूंजी होती है।
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प्रकृति का सच्चा उपहार

एक अमीर व्यापारी शहर की भागदौड़ से तंग आकर शांति की तलाश में एक सुदूर पहाड़ी गांव में गया। वहाँ उसने एक वृद्ध किसान को बड़े प्रेम से पौधे लगाते देखा। व्यापारी ने उत्सुकतावश पूछा कि इस उम्र में तुम ऐसे पौधे क्यों लगा रहे हो जिनके फल तुम्हें शायद खाने को भी न मिलें। किसान ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि हम जो पेड़ आज लगाते हैं, उनकी छांव में आने वाली पीढ़ियां सुकून पाती हैं। यह सुनकर व्यापारी की आंखें खुल गई और उसे समझ आया कि जीवन केवल अपने लिए जीने का नाम नहीं है, बल्कि दूसरों के जीवन को संवारना ही असली इंसानियत है।
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