#नैतिक कहानी
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सच्ची ईमानदारी की कीमत
“
रमेश शहर के बाजार में एक छोटी सी फलों की दुकान चलाता था। वह बहुत गरीब था लेकिन उसकी ईमानदारी दूर-दूर तक प्रसिद्ध थी। एक दिन एक अमीर व्यापारी उसकी दुकान पर फल खरीदने आया और गलती से मोहरों से भरा एक कीमती थैला वहीं छोड़ गया। रमेश ने जब थैला देखा, तो कुछ पल के लिए उसके मन में लालच आया कि वह इससे अपनी सारी गरीबी दूर कर सकता है। लेकिन उसके संस्कारों ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। उसने अगले दिन व्यापारी को ढूंढकर उसका थैला ससम्मान वापस कर दिया। व्यापारी रमेश की ईमानदारी देखकर बहुत प्रसन्न हुआ और उसे एक बड़ा पुरस्कार दिया। रमेश को पता चल गया कि ईमानदारी ही इंसान की सबसे बड़ी पूंजी होती है।
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