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डरावनी कहानी

हल्की सिहरन वाली छोटी कहानियाँ।

📖 50 रचनाएँ

अंतिम ट्रेन का मुसाफिर

सोहन रात की आखिरी लोकल ट्रेन से अपने गाँव लौट रहा था। डिब्बा पूरी तरह खाली था और बाहर घना कोहरा छाया हुआ था। तभी एक अजीब सी ठंडी हवा का झोंका आया और उसके सामने वाली सीट पर एक महिला आकर बैठ गई, जिसका चेहरा सफेद चादर से ढंका हुआ था। सोहन ने डरते हुए उससे पूछा कि आप कहाँ जा रही हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब ट्रेन एक सुनसान सुरंग में पहुँची, तो महिला ने अपनी चादर हटाई। उसके चेहरे की जगह केवल एक धधकता हुआ गड्ढा था। ट्रेन की ब्रेक फेल हो चुकी थी और उस वीरान सुरंग में सोहन की चीखें हमेशा के लिए खो गईं।

अटेरी की पुरानी डायरी

विक्रम को अपने नए पुराने घर की अटारी में एक धूल भरी डायरी मिली। डायरी के पन्ने पलटने पर उसे पता चला कि उसमें जो भी भविष्य की घटनाएँ लिखी थीं, वे सच साबित हो रही थीं। उसने उत्सुकतावश आगे के पन्ने पढ़े और सन्न रह गया। उस पर लिखा था कि आज रात ठीक बारह बजे विक्रम का परछाई से सामना होगा और उसकी साँसें थम जाएंगी। विक्रम ने हंसकर डायरी बंद कर दी और रात होने का इंतजार करने लगा। जैसे ही घड़ी की सुई बारह पर पहुँची, कमरे की बत्तियाँ बुझ गईं और आईने में उसकी खुद की परछाई ने मुस्कुराकर उसका गला दबाना शुरू कर दिया।

सूनसान सड़क की लिफ्ट

कार से घर लौटते वक्त राहुल की गाड़ी एक सुनसान हाइवे पर अचानक खराब हो गई। चारों तरफ घना कोहरा था और मोबाइल के सिग्नल पूरी तरह गायब थे। तभी सड़क किनारे एक सफेद लिबास पहने औरत ने लिफ्ट के लिए हाथ उठाया। राहुल ने इंसानियत दिखाते हुए उसे गाड़ी में बिठा लिया, लेकिन गाड़ी के अंदर आते ही अजीब सी सड़ी हुई गंध फैल गई। जब राहुल ने रियर व्यू मिरर में देखा, तो उस औरत की आंखें गायब थीं और उसका चेहरा खून से सना हुआ था। उसने चीखकर ब्रेक मारा, लेकिन तब तक गाड़ी एक गहरी खाई में गिर चुकी थी।

बंद संदूक का खौफ

अमित को अपने दादाजी के पुराने बक्से से एक हस्तलिखित डायरी मिली। जैसे ही उसने बक्से का ढक्कन पूरी तरह खोला, उसमें से एक ठंडी हवा का झोंका निकला और कमरे की मोमबत्तियां बुझ गईं। अंधेरे में उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसके कंधे पर हाथ रख कर कुछ पढ़ रही है। उसने तुरंत माचिस जलाई और डायरी के पन्ने पलटे तो पाया कि आखिरी पन्ने पर उसकी आज की मौत की तारीख लिखी हुई थी। ठीक उसी क्षण बक्से के अंदर से किसी ने जोर से नॉक किया और उसका दम घुटने लगा।

अंधेरे कुएं की गूंज

पुश्तैनी बाग के बीच स्थित वह सूखा कुआं हमेशा से गांव वालों के लिए आकर्षण और भय का केंद्र रहा था। विक्रम ने चुनौती स्वीकार करते हुए आधी रात को उस कुएं में झांका। कुएं के अंदर से पानी की बूंदें टपकने की आवाज आ रही थी, जबकि वह पूरी तरह सूखा था। अचानक अंदर से किसी बच्चे की रोने की आवाज गूंजी। विक्रम ने टॉर्च की रोशनी नीचे डाली तो उसे पानी में उसका अपना ही चेहरा तैरता हुआ दिखा, जो क्रूरता से मुस्कुरा रहा था। अगले ही पल किसी ने उसे पीछे से गहरे कुएं में खींच लिया। सुबह उसकी टॉर्च कुएं की मुंडेर पर लावारिस मिली।

लालटेन की रोशनी में छिपा सच

गांव के छोर पर बने एक पुराने मिट्टी के घर में सोहन अकेला रहता था। सर्द रात में जब उसने लालटेन जलाई, तो कमरे के कोने में एक अजीब सी परछाई हिलती हुई दिखाई दी। उसने सोचा यह उसका अपना साया होगा, लेकिन परछाई का हाथ स्वतंत्र रूप से उठ रहा था। डर के मारे सोहन का गला सूख गया और जब उसने भागने की कोशिश की, तो दरवाजे पर किसी ने अंदर से भारी ताला लगा दिया। तभी कोने से एक फुसफुसाती हुई आवाज आई, "अब तुम इस घर से कभी बाहर नहीं जा पाओगे।" सुबह जब ग्रामीण वहां पहुंचे, तो घर के अंदर सिर्फ एक बुझी हुई लालटेन और सोहन की घड़ी मिली।

आधी रात का रेडियो प्रसारण

विकास को पुराने रेडियो सुनने का अजीब शौक था। एक दिन उसने अपना पुराना ट्रांजिस्टर ऑन किया और उसकी सुई घुमाने लगा। सभी आवृत्तियों पर केवल सन्नाटा था, सिवाय एक के जिस पर कोई पुरानी दर्द भरी आवाज में भविष्यवाणी कर रहा था। उस आवाज ने बिल्कुल ठीक वही बातें कहीं जो विकास उस समय अपने कमरे में कर रहा था। विकास डर गया और उसने रेडियो का स्विच ऑफ करके सेल निकाल दिए, लेकिन फिर भी वह आवाज उसी गति से बजती रही। अचानक रेडियो से एक हाथ बाहर निकला और विकास के कंधे को कसकर पकड़ लिया। जब सुबह उसकी मां कमरे में आईं, तो रेडियो चालू था और विकास की सांसें थम चुकी थीं।

रेगिस्तान के बीचों-बीच खड़ी हवेली

सड़कों से भटककर तीन दोस्त रात के समय रेगिस्तान के बीचों-बीच बने एक प्राचीन किले नुमा घर के पास पहुंचे। उन्होंने सोचा कि सुबह तक यहीं आराम किया जाए। घर के अंदर प्राचीन फर्नीचर और जलाई गई मोमबत्तियां देखकर उन्हें हैरानी हुई जैसे कोई उनका ही इंतजार कर रहा हो। तभी भारी लकड़ी का मुख्य दरवाजा अपने आप जोर से बंद हो गया और उसकी कुंडी लग गई। कमरों से अजीब सी फुसफुसाहट और हंसने की आवाजें आने लगीं। जब दोस्तों ने भागने की कोशिश की, तो रेत के टीले के बीच से कई साये उनकी तरफ बढ़ते हुए दिखाई दिए। सुबह होने पर वहां सिर्फ कुछ पुरानी हड्डियां और उनकी गाड़ी का टूटा हुआ पहिया मिला।

दूसरी मंजिल की खाली खिड़की

रोहित अपने परिवार के साथ एक नए किराए के मकान में रहने आया था। मकान का किराया बहुत कम था क्योंकि उसके बारे में मोहल्ले में कई तरह की बातें मशहूर थीं। घर की दूसरी मंजिल पर एक खिड़की थी जिस पर हमेशा काले रंग का पर्दा पड़ा रहता था। रोहित के लाख मना करने के बावजूद उसके छोटे बेटे ने एक दिन जिज्ञासावश वह पर्दा हटा दिया। उस पल के बाद से घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। रात को उस खिड़की के शीशे पर बाहर से किसी के नाखून खुरचने की आवाजें आने लगीं और घर के सभी नल अपने आप खुलने लगे। जब उन्होंने मकान मालिक से पूछा, तो पता चला कि उस खिड़की के सामने खड़े होकर किसी ने आत्महत्या की थी और उसकी रूह आज भी वहीं भटकती है।

अक्सर बंद रहने वाले गोदाम का खौफ

शहर के पुराने बाजार में एक ऐसा गोदाम था जो पिछले तीस साल से हमेशा बंद रहता था। व्यापारी राघव ने सस्ते दाम मिलने पर उसे खरीद लिया और सफाई का काम शुरू किया। जैसे ही मजदूरों ने उसका भारी लोहे का दरवाजा खोला, अंदर से सड़े हुए फूलों और पुरानी धूल की तेज गंध बाहर आई। उस रात जब राघव गोदाम के कागजात देखने रुका, तो उसे कोनों से किसी के घुंघरुओं की आवाज सुनाई दी। उसने हिम्मत करके टार्च की रोशनी डाली, तो हवा में तैरती हुई एक धुंधली सी आकृति नजर आई जो तेजी से उसकी तरफ बढ़ने लगी। डर के मारे राघव बेहोश हो गया और सुबह जब उसे होश आया, तो गोदाम का दरवाजा अंदर से बंद था और बाहर उसकी खुद की चीखने की आवाज गूंज रही थी।

खिड़की पर दस्तक देती उंगलियां

चौथी मंजिल के फ्लैट में रहने वाली निकिता अक्सर रात को खिड़की के बाहर किसी के होने का अहसास करती थी। उसका फ्लैट सड़क से बहुत ऊपर था, इसलिए वहां किसी इंसान का पहुंचना नामुमकिन था। एक तूफानी रात को जब बिजली गुल हो चुकी थी, तब खिड़की के कांच पर किसी ने हल्के से नाखून से खरोंचना शुरू किया। निकिता ने डरते हुए टॉर्च जलाई और खिड़की की तरफ देखा। कांच के उस पार एक औरत लटकी हुई थी जिसके बाल बिखरे हुए थे और वह अजीब सी मुस्कान के साथ उसे घूर रही थी। उस औरत ने अचानक खिड़की का कांच जोर से पीटना शुरू कर दिया ताकि वह अंदर आ सके। निकिता चीख पड़ी और अपनी चाची के कमरे की तरफ भागी। अगली सुबह जब खिड़की खोली गई, तो वहां कांच पर ताजे खून के निशान बने हुए थे और कोई नहीं था।

चित्रकार का आखिरी कैनवास

अमित को पुरानी पेंटिंग बनाने का बहुत शौक था। उसने बाजार से एक पुरानी और गंदी सी पेंटिंग खरीदी जिसे साफ करके वह उसपर अपनी नई कला उकेरना चाहता था। जैसे ही उसने उस पेंटिंग की ऊपरी परत को पानी से साफ किया, उसके नीचे एक और भयानक चेहरा उभर आया। वह चेहरा किसी राक्षस का लग रहा था जिसकी आंखें खून से लाल थीं। अमित ने सोचा कि यह कोई भ्रम होगा और उसने सोना शुरू कर दिया। रात को उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उसकी छाती पर बैठा हो और उसका दम घुट रहा हो। जब उसने अपनी आंखें खोलीं, तो उसने देखा कि पेंटिंग वाला राक्षस दीवार से बाहर निकलकर उसके बिस्तर के पास खड़ा था। सुबह जब पुलिस आई, तो अमित का शरीर बिस्तर पर बेजान था और कैनवास पर एक नया खून से रंगा हुआ चित्र बना हुआ था।

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आखरी बस की सवारी

रोहन अपने दफ्तर से लौट रहा था और रात काफी हो चुकी थी। उसने घर जाने के लिए हाईवे पर आखिरी बस पकड़ी। बस के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था और केवल एक मंद सी रोशनी जल रही थी। ड्राइवर ने बिना किसी से कुछ कहे बस चलाना शुरू कर दिया। कुछ दूर जाने के बाद रोहन ने देखा कि बस में बैठे बाकी यात्री अजीब तरह से चुप थे और उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। जब रोहन ने कंडक्टर से टिकट मांगा, तो कंडक्टर ने अपनी गर्दन घुमाई और उसकी आँखें गायब थीं। तभी उसे याद आया कि यह वही बस थी जो पिछले हफ्ते एक भयानक दुर्घटना में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

पुराने कुएं का सच

गाँव के बाहर बने एक सुनसान खेत में एक पुराना कुआँ था, जिसके बारे में कहा जाता था कि उसमें से रात को संगीत की आवाजें आती हैं। राहुल और उसके दोस्तों ने इस बात की सच्चाई जानने के लिए रात के समय उस कुएं के पास जाने की योजना बनाई। जब वे वहां पहुंचे, तो वास्तव में कुएं के भीतर से घुंघरू की छनक और मधुर संगीत सुनाई दे रहा था। राहुल ने जैसे ही टॉर्च की रोशनी कुएं के अंदर डाली, पानी में तैरता हुआ एक चेहरा दिखाई दिया जो जोर-जोर से हंस रहा था। उसी पल राहुल के दोस्तों के पैर जमीन में धंस गए और कुएं से एक लंबा हाथ बाहर निकल आया।

अंधेरे कमरे का रहस्य

हमारे नए मकान का एक कमरा हमेशा ठंडा रहता था और वहां से अजीब सी सरसराहट की आवाजें आती थीं। मैंने एक रात हिम्मत करके उस कमरे का दरवाजा खोला तो अंदर कोई नहीं था, बस एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी थी जो खुद-ब-खुद हिल रही थी। उस पर धूल की परत जमी थी जिस पर किसी छोटे बच्चे के नंगे पैरों के निशान बन रहे थे। अचानक कमरे की खिड़की अपने आप जोर से बंद हो गई और हवा में एक डरावनी फुसफुसाहट गूंजी। मैंने जब पीछे मुड़कर देखना चाहा तो कोई अदृश्य शक्ति ने मेरा गला दबोच लिया और मेरी सांसें रुकने लगीं। किसी तरह मैंने खुद को छुड़ाया और उस घर से बाहर भागा, लेकिन आज भी मुझे लगता है कि वो परछाई मेरा पीछा कर रही है।

वीरान सड़क का यात्री

कार से घर लौटते वक्त जंगल के रास्ते में मेरी गाड़ी अचानक खराब हो गई और फोन का नेटवर्क भी गायब हो गया। मैंने दूर एक पेड़ के नीचे एक बुजुर्ग को हाथ देते हुए देखा और मदद मांगने के लिए उनकी तरफ बढ़ा। जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा, मैंने देखा कि उनके पैर जमीन पर टिके नहीं थे बल्कि हवा में तैर रहे थे और उनका चेहरा सफेद पड़ चुका था। उन्होंने बिना अपना सिर घुमाए मुझसे पूछा कि क्या तुमने मेरी खोई हुई मंजिल देखी है। डर के मारे मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई और मैं भागकर अपनी कार में बैठ गया, लेकिन कार का इंजन लाख कोशिश के बाद भी स्टार्ट नहीं हुआ। वो भयानक आकृति धीरे-धीरे मेरी कार के शीशे के पास आने लगी और फिर सब कुछ अंधेरे में डूब गया।