बगिया का आखिरी फूल
गांव के एक कोने में बने पुराने घर के आंगन में एक सुंदर सा गुलाब का पौधा था जिसकी देखभाल दादाजी वर्षों से करते थे। समय के साथ दादाजी की सेहत बिगड़ने लगी और वे उस पौधे को ज्यादा समय नहीं दे पाए, जिससे उस पर सिर्फ एक ही आखिरी फूल बचा था। सबको लगा कि अब यह पौधा सूख जाएगा और यह फूल भी मुरझा जाएगा। लेकिन पोते ने अपने दादाजी के प्यार को जीवित रखने के लिए उस पौधे की रोजाना खुद सिंचाई करनी शुरू कर दी। उसकी मेहनत रंग लाई और न केवल वह आखिरी फूल खिला रहा, बल्कि पौधे पर नए कोपल भी फूट पड़े।
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