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कुल 7 परिणाम मिले खोज शब्द: परख

मिट्टी के बर्तन और परख

कुम्हार मदन अपनी कला के लिए पूरे नगर में प्रसिद्ध था। वह बहुत सुंदर और मजबूत मटके बनाता था। एक दिन एक व्यापारी उसकी दुकान पर आया और उसने मटकों को परखने के लिए हर एक मटके को जोर से बजाकर देखा। मदन मुस्कुराया और उसने व्यापारी को एक कच्चा मटका दिखाया जो अभी पकने के लिए भट्टी में जाना बाकी था। व्यापारी ने कहा कि यह तो बहुत कमजोर है। मदन ने प्यार से समझाया कि हर उत्कृष्ट वस्तु को अपनी कमजोरी दूर करने के लिए आग की भट्टी से गुजरना पड़ता है। जीवन की कठिनाइयां भी वही भट्टी हैं जो इंसान को मजबूत बनाती हैं। व्यापारी मदन की इस बात से बेहद प्रभावित हुआ और बिना कुछ कहे समझ गया कि संघर्ष ही सफलता की असली कुंजी है।
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सुनार की सच्ची परख

नगर के प्रसिद्ध सुनार मदन लाल के पास एक दिन एक युवक आया और उसने एक सोने का सिक्का दिखाकर उसे असली परखने को कहा। मदन लाल ने सिक्के को हाथ में लिया, उसकी चमक देखी, और फिर बिना कुछ बोले उसे तराजू पर तौल दिया। उन्होंने युवक से कहा कि सोना सिर्फ चमकने से असली नहीं होता, उसकी शुद्धता आग में तपकर ही साबित होती है। युवक ने हैरान होकर पूछा कि क्या इस सिक्के के साथ भी कुछ ऐसा करना होगा। मदन लाल ने समझाया कि इंसान का चरित्र भी सोने की तरह होता है, जो संकट और कठिनाइयों की भट्टी में तपकर ही अपनी असली कीमत और महानता साबित करता है। युवक को यह बात दिल पर लग गई और वह समझ गया कि जीवन की बाधाएं इंसान को मजबूत बनाती हैं।
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सच्चे मित्र की परख

एक छोटे से गाँव में सोहन और मोहन नाम के दो पक्के मित्र रहते थे। दोनों हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देते थे। एक दिन वे दोनों जंगल के रास्ते से गुजर रहे थे, तभी अचानक उनके सामने एक खतरनाक भालू आ गया। सोहन बिना कुछ सोचे-समझे तुरंत पास के एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन मोहन को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था। मोहन ने मदद के लिए चिल्लाया, पर सोहन ने अपनी जान बचाते हुए उसकी कोई मदद नहीं की। मोहन ने तुरंत अपनी साँस रोक ली और जमीन पर लेट गया क्योंकि उसने सुन रखा था कि भालू मरे हुए इंसानों को नहीं खाता। भालू आया, मोहन को सूँघा और मरा हुआ समझकर आगे निकल गया। जब संकट टल गया, तब सोहन पेड़ से नीचे उतरा और हँसते हुए मोहन से पूछा कि भालू उसके कान में क्या फुसफुसा रहा था। मोहन ने बहुत ही शांत भाव से उत्तर दिया कि भालू ने मुझे समझाया है कि असली मित्र वही होता है जो संकट के समय अकेला छोड़कर नहीं भागता। सोहन को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसे शर्मिंदगी उठानी पड़ी। इस घटना से मोहन को यह बड़ी सीख मिली कि सच्चे मित्रों की पहचान हमेशा मुसीबत के समय ही होती है।
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चित्रकार और दर्पण

नगर के प्रसिद्ध चित्रकार विक्रम अपनी कला के लिए पूरे राज्य में जाने जाते थे। वह जब भी किसी का चित्र बनाते, तो उसकी खामियों को छिपाकर उसे और भी सुंदर बना देते थे। एक दिन एक गरीब और साधारण दिखने वाला वृद्ध उनके पास आया और अपना चित्र बनवाने की इच्छा जताई। विक्रम ने उसे देखा और सोचा कि इसका चित्र बनाने से कोई ख्याति नहीं मिलेगी, इसलिए उसने जानबूझकर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और एक साधारण सी तस्वीर थमा दी। वृद्ध ने तस्वीर ली और मुस्कुराते हुए कहा कि असली चित्रकार वही है जो बाहरी रूप के साथ-साथ भीतर की सच्चाई को भी कैनवास पर उतार सके। उसने विक्रम को एक जादुई दर्पण दिया जिसमें इंसान का असली चरित्र दिखाई देता था। उस दर्पण में देखने पर विक्रम को अपनी कला का अहंकार साफ नजर आया। उसे अपनी गलती का पछतावा हुआ और उसने कसम खाई कि वह कभी भी किसी इंसान को उसकी बाहरी स्थिति से नहीं आंकेगा।
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हीरे की चमक

कीमत हमारी वो समझेगा जिसे परख हो,
सस्ते लोगों के लिए हम हमेशा महंगे हैं।
भीड़ में खो जाने का शौक नहीं हमें,
हम अकेले ही पूरी महफिल पर भारी हैं।
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वक्त की कसौटी

परखना चाहो तो वक्त पर परख लेना, आंधी में भी जो टिक जाए वो दरख्त लेना। दोस्ती में हिसाब किताब नहीं होता मेरे दोस्त, बस अपना सब कुछ इस पर शर्त लेना।
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