बगीचे का आखिरी फूल
पिताजी के जाने के बाद उनके द्वारा लगाए गए बगीचे की देखभाल करने वाला कोई नहीं था। सारे पौधे सूख चुके थे और मिट्टी अपनी नमी खो चुकी थी। एक दिन अचानक मेरी नजर कोने में खिले एक छोटे से पीले फूल पर पड़ी, जो तमाम मुश्किलों के बावजूद अपनी पूरी ताकत से खिला हुआ था। उसे देखकर मुझे पिताजी की वह सीख याद आ गई जो वे अक्सर दिया करते थे कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, कभी हार मत मानो। मैंने तुरंत पानी उठाया और सूखे पौधों की सिंचाइ शुरू कर दी। वह आखिरी फूल मेरे लिए एक संदेश बन गया, जिसने मुझे जीवन की हर चुनौती का डटकर सामना करने की नई ऊर्जा और हौसला दे दिया।
1