काग़ज़ की सफ़ेद कश्ती और गहरा समंदर
एक छोटे से गाँव में आरव नाम का लड़का रहता था, जिसे कागज की कश्तियाँ बनाने का बहुत शौक था। वह हर शाम नदी के किनारे बैठकर अपनी कश्तियाँ पानी में तैरता था। लोग उसका मजाक उड़ाते थे कि ये कागज की नावें पानी में गल जाएंगी और कभी पार नहीं पहुँचेंगी। लेकिन आरव का विश्वास अडिग था। एक दिन उसने एक बड़ी और मजबूत कागज की नाव बनाई, जिस पर मोम की परत चढ़ाई थी। जब उसने उसे धारा में उतारा, तो वह नाव तेज लहरों से मुकाबला करती हुई बहुत दूर निकल गई। इस घटना ने पूरे गाँव को सिखाया कि यदि इरादे मजबूत हों, तो साधन चाहे छोटे हों, सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
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