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कुल 161 परिणाम मिले खोज शब्द: डर

अंतिम पन्ने की इबारत

पुस्तकालय के सबसे कोने वाले धूल भरे शेल्फ से जब अक्षित ने एक पुरानी डायरी निकाली, तो उसके पन्ने पीले पड़ चुके थे। उसने जैसे ही डायरी का पहला पन्ना पलटा, उस पर उसी दिन की तारीख और उसका अपना ही नाम लिखा हुआ था। हैरानी की बात यह थी कि उस पर लिखा हुआ था कि आज रात ठीक बारह बजे अक्षित अपनी ही अलमारी के सामने दम तोड़ देगा। उसने इसे किसी का भद्दा मजाक समझकर नजरअंदाज कर दिया और अपने हॉस्टल के कमरे में लौट आया। रात के ग्यारह बज चुके थे और कमरे की खिड़कियां अपने आप जोर-जोर से खड़खड़ाने लगीं। जैसे ही घड़ी में बारह बजे, डायरी का आखिरी पन्ना अपने आप पलट गया और कमरे की बत्ती हमेशा के लिए गुल हो गई।
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कांच के पीछे का चेहरा

अमित ने अपने नए कमरे की दीवार पर एक बहुत बड़ा पुराना आईना लगवाया था, जो कबाड़खाने से बेहद सस्ती कीमत पर मिला था। शुरुआत के कुछ दिन तो सब सामान्य रहा, लेकिन फिर उसने गौर किया कि आईने में दिखने वाली उसकी परछाई उसके साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही थी। एक रात जब वह अपने बाल सुधार रहा था, तब आईने में दिख रहे उसके अक्स ने उसकी तरफ देखकर एक खौफनाक मुस्कान दी और अपना गला धीरे से पकड़ लिया। अमित डर के मारे चीख पड़ा और उसने हथौड़ा उठाकर उस आईने पर जोरदार वार किया। जैसे ही कांच के टुकड़े बिखरे, उसके गले पर अचानक गहरे नीले निशान उभर आए और वह बेहोश हो गया।
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नीली रौशनी का कुहासा

सर्दियों की एक शांत रात जब रोहन अपनी कार से सुनसान हाईवे से गुजर रहा था, तो रास्ते में अचानक एक घना नीला कुहासा छा गया। उसने देखा कि सड़क के किनारे एक महिला सफेद साड़ी में हाथ देकर लिफ्ट मांग रही थी, जिसका चेहरा बालों से पूरी तरह ढका हुआ था। रोहन ने इंसानियत दिखाते हुए कार की रफ्तार धीमी की और शीशा नीचे किया, लेकिन तभी उसे महसूस हुआ कि उस महिला के पैर जमीन से हवा में थोड़े ऊपर लटके हुए थे। डर के मारे उसने तुरंत एक्सीलेटर दबा दिया, लेकिन कार आगे बढ़ने के बजाय पीछे की तरफ खिंचने लगी। जब उसने रियर व्यू मिरर में देखा, तो वो महिला उसकी कार की पिछली सीट पर बैठी मुस्कुरा रही थी।
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पहाड़ी बंगले का साया

छुट्टियां बिताने के लिए मैंने पहाड़ों पर एक पुराना और अकेला बंगला किराए पर लिया था, जिसके बारे में गांव वाले बात करने से भी कतराते थे। पहली रात ही मुझे छत पर किसी के भारी जूतों के चलने की आवाज सुनाई दी, जो पूरे घर में गूंज रही थी। जब मैं टॉर्च लेकर ऊपर गया तो वहां कोई नहीं था, सिवाय एक खुली हुई पुरानी डायरी के जिसके पन्ने तेज हवा से खुद-ब-खुद पलट रहे थे। डायरी का आखिरी पन्ना खाली था जिस पर मेरे ही हाथों से लिखा हुआ एक संदेश उभर आया कि कल तुम्हारी बारी है। यह देखकर मेरे हाथ से टॉर्च छूटकर गिर गई और चारों तरफ घना अंधेरा छा गया, साथ ही किसी के हंसने की भारी आवाज चारों तरफ गूंजने लगी।
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वीरान सड़क का यात्री

कार से घर लौटते वक्त जंगल के रास्ते में मेरी गाड़ी अचानक खराब हो गई और फोन का नेटवर्क भी गायब हो गया। मैंने दूर एक पेड़ के नीचे एक बुजुर्ग को हाथ देते हुए देखा और मदद मांगने के लिए उनकी तरफ बढ़ा। जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा, मैंने देखा कि उनके पैर जमीन पर टिके नहीं थे बल्कि हवा में तैर रहे थे और उनका चेहरा सफेद पड़ चुका था। उन्होंने बिना अपना सिर घुमाए मुझसे पूछा कि क्या तुमने मेरी खोई हुई मंजिल देखी है। डर के मारे मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई और मैं भागकर अपनी कार में बैठ गया, लेकिन कार का इंजन लाख कोशिश के बाद भी स्टार्ट नहीं हुआ। वो भयानक आकृति धीरे-धीरे मेरी कार के शीशे के पास आने लगी और फिर सब कुछ अंधेरे में डूब गया।
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अंधेरे कमरे का रहस्य

हमारे नए मकान का एक कमरा हमेशा ठंडा रहता था और वहां से अजीब सी सरसराहट की आवाजें आती थीं। मैंने एक रात हिम्मत करके उस कमरे का दरवाजा खोला तो अंदर कोई नहीं था, बस एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी थी जो खुद-ब-खुद हिल रही थी। उस पर धूल की परत जमी थी जिस पर किसी छोटे बच्चे के नंगे पैरों के निशान बन रहे थे। अचानक कमरे की खिड़की अपने आप जोर से बंद हो गई और हवा में एक डरावनी फुसफुसाहट गूंजी। मैंने जब पीछे मुड़कर देखना चाहा तो कोई अदृश्य शक्ति ने मेरा गला दबोच लिया और मेरी सांसें रुकने लगीं। किसी तरह मैंने खुद को छुड़ाया और उस घर से बाहर भागा, लेकिन आज भी मुझे लगता है कि वो परछाई मेरा पीछा कर रही है।
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पुराने कुएं का सच

गाँव के बाहर बने एक सुनसान खेत में एक पुराना कुआँ था, जिसके बारे में कहा जाता था कि उसमें से रात को संगीत की आवाजें आती हैं। राहुल और उसके दोस्तों ने इस बात की सच्चाई जानने के लिए रात के समय उस कुएं के पास जाने की योजना बनाई। जब वे वहां पहुंचे, तो वास्तव में कुएं के भीतर से घुंघरू की छनक और मधुर संगीत सुनाई दे रहा था। राहुल ने जैसे ही टॉर्च की रोशनी कुएं के अंदर डाली, पानी में तैरता हुआ एक चेहरा दिखाई दिया जो जोर-जोर से हंस रहा था। उसी पल राहुल के दोस्तों के पैर जमीन में धंस गए और कुएं से एक लंबा हाथ बाहर निकल आया।
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आखरी बस की सवारी

रोहन अपने दफ्तर से लौट रहा था और रात काफी हो चुकी थी। उसने घर जाने के लिए हाईवे पर आखिरी बस पकड़ी। बस के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था और केवल एक मंद सी रोशनी जल रही थी। ड्राइवर ने बिना किसी से कुछ कहे बस चलाना शुरू कर दिया। कुछ दूर जाने के बाद रोहन ने देखा कि बस में बैठे बाकी यात्री अजीब तरह से चुप थे और उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। जब रोहन ने कंडक्टर से टिकट मांगा, तो कंडक्टर ने अपनी गर्दन घुमाई और उसकी आँखें गायब थीं। तभी उसे याद आया कि यह वही बस थी जो पिछले हफ्ते एक भयानक दुर्घटना में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।
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रात के अंधेरे में चमकता जुगनू

एक घने और अंधेरे जंगल में नन्हा जुगनू रहता था जो अपने छोटे से आकार और कम रोशनी को लेकर हमेशा उदास रहता था। उसे लगता था कि बड़े जीव और चमकदार तारे ही इस दुनिया को रोशन कर सकते हैं, उसकी इस छोटी सी रोशनी का कोई मोल नहीं है। एक शाम जंगल में अचानक घना अंधेरा छा गया और कोई भी रास्ता नहीं देख पा रहा था, जिससे सभी जानवर बुरी तरह डर गए। तब उस छोटे से जुगनू ने हिम्मत जुटाई और अपनी क्षमता के अनुसार अपनी पूरी ताकत से चमकना शुरू किया। उसकी उस नन्ही सी रोशनी ने जंगल के छोटे से रास्ते को रोशन कर दिया, जिससे खोए हुए राहगीर को सही दिशा मिल गई। सबने उस जुगनू की इस महान कोशिश की बहुत तारीफ की और उसे समझाया कि दुनिया में हर एक प्राणी का अपना विशेष महत्व होता है, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न दिखाई दे। इस घटना ने जुगनू का आत्मविश्वास हमेशा के लिए बढ़ा दिया और उसने कभी अपनी कमियों पर रोना नहीं रोया।
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पुरानी मीनार और चींटी का प्रयास

एक ऐतिहासिक गाँव में एक बहुत ऊंची पुरानी मीनार थी जिस पर चढ़ना नामुमकिन माना जाता था। एक दिन एक छोटे से बच्चे ने उस पर चढ़ने की जिद पकड़ ली। सभी गाँववालों ने उसे डराया कि यह बहुत खतरनाक है और बड़े-बड़े लोग भी इसमें असफल हो चुके हैं। लेकिन बच्चे ने किसी की बात नहीं सुनी और वह धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ने लगा। रास्ते में उसे कई बार पिसलनों का सामना करना पड़ा और वह कई बार नीचे गिर गया। हर बार गिरने के बाद वह अपने घुटनों को झाड़ता और फिर से पूरी ताकत से आगे बढ़ जाता। अंत में उसने अपनी छोटी और नन्हीं कोशिशों से मीनार की चोटी पर झंडा फहरा ही दिया। तब उसने सबको सिखाया कि बड़ी से बड़ी चुनौती को भी लगातार छोटे प्रयासों से जीता जा सकता है।
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मिट्टी के बर्तन और कुम्हार का धैर्य

एक छोटे से गाँव में एक कुम्हार रहता था जो रोजाना मिट्टी के नए और खूबसूरत बर्तन बनाता था। लोग उसकी कला की सराहना करते थे क्योंकि उसकी हर रचना में एक अनोखा आकर्षण होता था। एक दिन उसके पास एक नया सीखने वाला युवक आया और उसने पूछा कि आप हर बर्तन को इतनी मेहनत से क्यों संवारते हैं जबकि वे अंत में बिक जाते हैं। कुम्हार मुस्कुराया और उसने एक कच्ची मिट्टी की लोई उठाई। उसने कहा कि जब तक मिट्टी चाक पर घूमती है और मेरी उंगलियों का दबाव सहती है, तभी तक उसे एक सुंदर आकार मिलने की संभावना रहती है। यदि हम कठिनाइयों से डरकर पीछे हट जाएं, तो हम कभी भी मजबूत और उपयोगी नहीं बन सकते। यह सुनकर युवक को जीवन का एक बहुत बड़ा पाठ मिला कि संघर्ष ही हमें सही दिशा और पहचान देता है।
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अनंत आकाश और नन्हा पक्षी

घने जंगल के एक ऊंचे पेड़ पर चीकू नाम का नन्हा पक्षी रहता था। उसे उड़ने से बहुत डर लगता था क्योंकि उसने कभी ऊंचे आसमान को पार नहीं किया था। उसके बाकी साथी रोज बादलों के पार उड़ान भरते, और वह नीचे बैठकर उन्हें देखता रहता था। एक दिन जंगल में अचानक आग लग गई और उसका पेड़ खतरे में आ गया। जान बचाने के लिए चीकू के पास उड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उसने अपने पंख फैलाए और डर को पीछे छोड़कर आसमान में छलांग लगा दी। उस दिन उसे समझ आया कि डर सिर्फ मन का वहम है, और पंखों में आसमान को नापने की ताकत हमेशा से छिपी होती है।
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