श ShayariForYou
🔍 खोज व अनुसंधान

"रात" के लिए परिणाम

हिंदी, उर्दू, हिंग्लिश या अंग्रेज़ी में शायरी, शेर, कवि या भाव खोजें।

कुल 113 परिणाम मिले खोज शब्द: रात

आधी रात का संगीत

अमित एक संगीतकार था जो अपने नए एल्बम की रचना के लिए एक शांत पहाड़ी बंगले में रहने गया था। हर रात ठीक बारह बजे, उसके कमरे में रखे बंद पियानो से खुद-ब-खुद एक उदास धुन बजने लगती थी। शुरू में उसे लगा कि यह हवा का असर होगा, लेकिन एक रात उसने पियानो के पास जाकर देखा कि अदृश्य उंगलियां उन चाबियों पर थिरक रही थीं। जैसे ही उसने पियानो को छूना चाहा, कमरे के सारे शीशे एक साथ चकनाचूर हो गए और हवा में एक अजीब सी आवाज गूंजी कि यह संगीत अब कभी खत्म नहीं होगा।
👁️ 0

काले पानी का रहस्य

शहर के एक पुराने और गहरे कुएं के पास जाने से हर कोई डरता था। लोक कथाओं के अनुसार, उस कुएं का पानी किसी की प्यास नहीं बुझाता बल्कि उसकी आत्मा खींच लेता है। तरुण एक विज्ञान का छात्र था और इन अंधविश्वासों को नहीं मानता था। एक पूर्णिमा की रात, वह उस कुएं के पास गया और उसका पानी झांककर देखने लगा। पानी बिल्कुल शांत था, लेकिन अचानक उसमें से एक काले धुएं का हाथ निकला और तरुण की कलाई को पकड़ लिया। तरुण ने जब खुद को छुड़ाने की कोशिश की, तो कुएं के भीतर से सैकड़ों डरावनी आवाजें आने लगीं जो उसका नाम पुकार रही थीं।
👁️ 1

सर्दियों की रात का साया

कड़ाके की ठंड में राहुल अपने गांव लौट रहा था। कोहरा इतना घना था कि सामने का रास्ता बिल्कुल दिखाई नहीं दे रहा था। तभी सड़क के किनारे उसे एक बुजुर्ग महिला दिखाई दी जो ठंड से कांप रही थी। राहुल ने अपनी कार रोकी और उसे अंदर बिठा लिया। कुछ दूर चलने के बाद जब उसने महिला से पूछा कि वह कहां जाएगी, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। राहुल ने रियर व्यू मिरर में देखा, तो महिला की जगह कार की पिछली सीट पर केवल बर्फ की एक ठंडी परत और सूखी हड्डियां पड़ी थीं। एक भयानक चीख के साथ कार का पहिया अपने आप थम गया।
👁️ 2

रेगिस्तान की सुनसान हवेली

राजस्थान के एक वीरान इलाके में बने पुराने किलेनुमा मकान में सोहन ने एक रात बिताने का फैसला किया। चारों तरफ सिर्फ रेत और खामोश रात का अंधेरा था। जब रात के दो बजे, तो अचानक भारी दरवाजों के अपने आप खुलने और बंद होने की आवाजें आने लगीं। सोहन ने टॉर्च जलाकर देखा, तो दीवार पर लटकी पुरानी पेंटिंग में बने राजा की आंखें जीवित हो उठी थीं और वह उसे घूर रहा था। कमरे का तापमान अचानक शून्य से नीचे गिर गया और पैरों तले रेत खिसकने लगी। वह किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागा, लेकिन पीछे से गूंजती हंसी आज भी उसके कानों में गूंजती है।
👁️ 2

पुरानी घड़ी की सुई

अजय को एंटीक घड़ियाँ जमा करने का शौक था। उसने शहर की एक पुरानी दुकान से एक ऐसी दीवार घड़ी खरीदी जिसकी सुइयां हमेशा उल्टी दिशा में घूमती थीं। रात के ठीक तीन बजे उस घड़ी से टिक-टिक की आवाज के साथ तेज सायरन जैसी आवाज आने लगी। अजय ने जब उसे उतारने की कोशिश की, तो दीवार पर एक परछाई उभर कर सामने आई जो बिल्कुल उसकी अपनी नकल थी लेकिन उसकी आँखें लाल थीं। परछाई ने दीवार से बाहर निकलकर अजय का गला पकड़ लिया और अगले दिन वह घड़ी फिर से अपनी सामान्य रफ्तार से चलने लगी।
👁️ 1

अधूरा मिट्टी का खिलौना

कुम्हार मदन लाल अपनी मिट्टी की दुकान में अकेले बैठकर चाक चला रहा था। उसने रात में एक अजीब सी आकृति को मिट्टी से खुद-ब-खुद आकार लेते देखा। उसे लगा कि शायद यह उसका भ्रम है, इसलिए उसने नजरअंदाज कर दिया और दुकान बंद करने लगा। तभी एक छोटे बच्चे की रोने की आवाज गूंजी और टेबल पर रखा वो अधूरा मिट्टी का खिलौना अपने आप चलने लगा। मदन ने डरते हुए उस खिलौने के पास जाकर देखा तो उसके रोंगटे खड़े हो गए, क्योंकि वह खिलौना बिल्कुल उसके अपने बचपन के उस खिलौने जैसा था जो तीस साल पहले खो गया था।
👁️ 2

पीले कागजों का बंडल

गांव के बाहरी हिस्से में स्थित पुराने डाकघर की सफाई करते समय रमित को पीले पड़ चुके कागजों का एक पुराना बंडल मिला। जब उसने उन पत्रों को पढ़ना शुरू किया, तो पाया कि वे सभी उसी पते पर लिखे गए थे जहाँ वह खुद रहता है और भेजने वाले का नाम भी वही था जो उसका अपना था। पत्रों पर दर्ज तारीखें आने वाले कल की थीं। हैरान होकर उसने रात के ठीक बारह बजे अपने नाम से आए उस नए लिफाफे को खोला, जिसके अंदर एक पन्ना था जिस पर लिखा था कि अब पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है। तभी डाकघर के दरवाजे पर जोर से दस्तक गूंजी और ठंडी हवा का एक झोंका उसकी रीढ़ में सिहरन पैदा कर गया।
👁️ 1

पुरानी मीनार की ऊपरी मंजिल

शहर के बीचों-बीच बनी वह ऐतिहासिक मीनार पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र थी, लेकिन उसकी सबसे ऊपरी मंजिल पर जाने की सख्त मनाही थी। इतिहास के छात्र राहुल को इस प्रतिबंध के पीछे का राज़ जानना था। वह चुपचाप रात के समय मीनार के अंदर घुस गया और सीढ़ियां चढ़ने लगा। ऊपर पहुंचते ही उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे हवा का तापमान बहुत कम हो गया हो। उसने अपनी टॉर्च जलाई और सामने देखा कि एक परछाई दीवार पर लिख रही थी। जब उसने पास जाकर देखा, तो वह शब्द उसकी अपनी ही मौत की तारीख थी। तभी पीछे से दरवाजे के भारी ताले के बंद होने की आवाज गूंजी और मीनार की घड़ी ने रात के ठीक बारह बजा दिए।
👁️ 2

रेगिस्तान की सूखी बालू में दबा राज़

जैसलमेर की सुनसान बालू पर जब रात गहरी होती है, तो रेत के टीलों से कदमों की आहट सुनाई देती है। सोहन एक फोटोग्राफर था जो रेगिस्तान की खूबसूरती कैद करने गया था। उसने शाम ढलते ही एक प्राचीन खंडहर के पास अपना कैंप लगाया। रात के सन्नाटे में उसे लगा कि कोई तंबू के बाहर मदद मांग रहा है। जब सोहन ने बाहर झांक कर देखा, तो वहां कोई नहीं था, केवल हवा के साथ उड़ती हुई रेत थी। अचानक, रेत के भीतर से एक कंकाल बाहर निकला और उसका हाथ पकड़ लिया। डर के मारे सोहन बेहोश हो गया। सुबह जब स्थानीय लोग उसे होश में लाए, तो उसने देखा कि उसकी कलाई पर वही सदियों पुराना कंगन बंधा था जो उस कंकाल के हाथ में था।
👁️ 2

अंधेरी सुरंग का साया

अमित और उसके दोस्त फोटोग्राफी के शौक में शहर के पास एक पुरानी बंद सुरंग में चले गए। सुरंग के अंदर बहुत अंधेरा था और उनकी मशाल की रोशनी भी मद्धम पड़ने लगी थी। तभी उन्हें अपने पीछे पैरों की भारी आवाज सुनाई दी। उन्होंने मुड़कर टॉर्च की रोशनी डाली, तो वहाँ कोई नहीं था, सिवाय दीवारों पर खून से लिखे उनके अपने नाम के। अमित के दोस्तों ने तुरंत बाहर भागने का फैसला किया, लेकिन सुरंग का मुहाना किसी भारी चट्टान से बंद हो चुका था। अंधेरे के भीतर से एक अजीब सी हँसी गूंज उठी और उनकी टॉर्च एक-एक करके बुझने लगीं।
👁️ 2

दीवार के पीछे की आहट

रोहन ने जब शहर के बाहर एक पुराना मकान बेहद कम कीमत पर खरीदा, तो उसे लगा कि उसकी किस्मत चमक गई है। लेकिन पहली ही रात उसे अपने बेडरूम की दीवार के पीछे से किसी के खरोंचने की आवाज सुनाई दी। उसने सोचा कि शायद चूहे होंगे, इसलिए उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। अगली रात आवाजें और तेज हो गईं, मानो कोई दीवार तोड़कर बाहर आना चाहता हो। रोहन ने हथौड़ा लेकर दीवार पर वार किया तो प्लास्टर उखड़ने लगा और अंदर से एक नरकंकाल बाहर आ गिरा, जिसके हाथ में उसी मकान के कागजात थे। तभी घर का मुख्य दरवाजा अपने आप लॉक हो गया।
👁️ 2

अंतिम ट्रेन का मुसाफिर

सोहन रात की आखिरी लोकल ट्रेन से अपने गाँव लौट रहा था। डिब्बा पूरी तरह खाली था और बाहर घना कोहरा छाया हुआ था। तभी एक अजीब सी ठंडी हवा का झोंका आया और उसके सामने वाली सीट पर एक महिला आकर बैठ गई, जिसका चेहरा सफेद चादर से ढंका हुआ था। सोहन ने डरते हुए उससे पूछा कि आप कहाँ जा रही हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब ट्रेन एक सुनसान सुरंग में पहुँची, तो महिला ने अपनी चादर हटाई। उसके चेहरे की जगह केवल एक धधकता हुआ गड्ढा था। ट्रेन की ब्रेक फेल हो चुकी थी और उस वीरान सुरंग में सोहन की चीखें हमेशा के लिए खो गईं।
👁️ 2