सफर का आखिरी मुसाफिर
एक ठंडी शाम को एक बूढ़ा यात्री एक अनजान गाँव में पहुँचा। उसके पास केवल एक कंबल और थोड़ा सा भोजन था। रास्ते में उसे एक काँपता हुआ बच्चा मिला जिसने ठंड से बचने के लिए मदद माँगी। बूढ़े ने बिना एक पल गंवाए अपना कंबल बच्चे को ओढ़ा दिया और खुद ठंड सहने लगा। लोगों ने पूछा कि आपने अपना इकलौता कंबल क्यों दे दिया? बूढ़े ने कहा कि असली धन वह नहीं जो तिजोरी में बंद रहे, बल्कि वह है जो किसी जरूरतमंद के काम आ सके। उस रात उसे जो आंतरिक शांति मिली, उसने उसकी सारी ठंड दूर कर दी।
3