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कुल 77 परिणाम मिले खोज शब्द: डर

घने जंगल की छुपी हुई कुटिया

शहर से दूर एक घने जंगल में ट्रेकिंग करते हुए रोहन रास्ता भटक गया। चारों तरफ घना अंधेरा छा चुका था और जंगली जानवरों की आवाजें डराने लगी थीं। तभी उसे दूर एक छोटी सी कुटिया में हल्की सी लालटेन जलती हुई दिखाई दी। उसने राहत की सांस ली और मदद मांगने के लिए उस कुटिया की तरफ बढ़ गया। दरवाजा खुला हुआ था और अंदर एक बूढ़ी औरत चूल्हे के पास बैठी थी। रोहन ने जब उससे पानी मांगा, तो औरत ने बिना चेहरा घुमाए बर्तन उसकी तरफ बढ़ा दिया। जब रोहन ने पानी पीने के लिए बर्तन उठाया, तो उसके होश उड़ गए क्योंकि उसमें पानी की जगह खून भरा था। उसने भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे पर कोई अदृश्य दीवार थी।
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समुद्र किनारे का वीरान लाइटहाउस

तटीय इलाके का वह पुराना लाइटहाउस पिछले पचास सालों से बंद पड़ा था। विक्रम को रोमांचक जगहों पर घूमने का शौक था, इसलिए वह उस खण्डहर नुमा लाइटहाउस के अंदर चला गया। अंदर सीढ़ियां बहुत संकरी थीं और दीवारों पर नमी से अजीब सी बदबू आ रही थी। सबसे ऊपर पहुंचकर उसने खिड़की से समंदर की लहरों को देखा। तभी पीछे से किसी ने भारी आवाज में कहा कि यहाँ से तुरंत चले जाओ। विक्रम ने मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था, लेकिन कमरा अंदर से बंद हो चुका था। हवा का एक तेज झोंका आया और लाइटहाउस का पुराना बल्ब जल उठा। उसने देखा कि कोने में रखी कुर्सी पर एक इंसान बैठा है जिसका चेहरा गायब था। विक्रम किसी तरह जान बचाकर वहां से भागा।
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रेगिस्तान की सूखी बालू में दबा राज़

जैसलमेर की सुनसान बालू पर जब रात गहरी होती है, तो रेत के टीलों से कदमों की आहट सुनाई देती है। सोहन एक फोटोग्राफर था जो रेगिस्तान की खूबसूरती कैद करने गया था। उसने शाम ढलते ही एक प्राचीन खंडहर के पास अपना कैंप लगाया। रात के सन्नाटे में उसे लगा कि कोई तंबू के बाहर मदद मांग रहा है। जब सोहन ने बाहर झांक कर देखा, तो वहां कोई नहीं था, केवल हवा के साथ उड़ती हुई रेत थी। अचानक, रेत के भीतर से एक कंकाल बाहर निकला और उसका हाथ पकड़ लिया। डर के मारे सोहन बेहोश हो गया। सुबह जब स्थानीय लोग उसे होश में लाए, तो उसने देखा कि उसकी कलाई पर वही सदियों पुराना कंगन बंधा था जो उस कंकाल के हाथ में था।
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अंधेरी सुरंग का साया

अमित और उसके दोस्त फोटोग्राफी के शौक में शहर के पास एक पुरानी बंद सुरंग में चले गए। सुरंग के अंदर बहुत अंधेरा था और उनकी मशाल की रोशनी भी मद्धम पड़ने लगी थी। तभी उन्हें अपने पीछे पैरों की भारी आवाज सुनाई दी। उन्होंने मुड़कर टॉर्च की रोशनी डाली, तो वहाँ कोई नहीं था, सिवाय दीवारों पर खून से लिखे उनके अपने नाम के। अमित के दोस्तों ने तुरंत बाहर भागने का फैसला किया, लेकिन सुरंग का मुहाना किसी भारी चट्टान से बंद हो चुका था। अंधेरे के भीतर से एक अजीब सी हँसी गूंज उठी और उनकी टॉर्च एक-एक करके बुझने लगीं।
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दीवार के पीछे की आहट

रोहन ने जब शहर के बाहर एक पुराना मकान बेहद कम कीमत पर खरीदा, तो उसे लगा कि उसकी किस्मत चमक गई है। लेकिन पहली ही रात उसे अपने बेडरूम की दीवार के पीछे से किसी के खरोंचने की आवाज सुनाई दी। उसने सोचा कि शायद चूहे होंगे, इसलिए उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। अगली रात आवाजें और तेज हो गईं, मानो कोई दीवार तोड़कर बाहर आना चाहता हो। रोहन ने हथौड़ा लेकर दीवार पर वार किया तो प्लास्टर उखड़ने लगा और अंदर से एक नरकंकाल बाहर आ गिरा, जिसके हाथ में उसी मकान के कागजात थे। तभी घर का मुख्य दरवाजा अपने आप लॉक हो गया।
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अंतिम ट्रेन का मुसाफिर

सोहन रात की आखिरी लोकल ट्रेन से अपने गाँव लौट रहा था। डिब्बा पूरी तरह खाली था और बाहर घना कोहरा छाया हुआ था। तभी एक अजीब सी ठंडी हवा का झोंका आया और उसके सामने वाली सीट पर एक महिला आकर बैठ गई, जिसका चेहरा सफेद चादर से ढंका हुआ था। सोहन ने डरते हुए उससे पूछा कि आप कहाँ जा रही हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब ट्रेन एक सुनसान सुरंग में पहुँची, तो महिला ने अपनी चादर हटाई। उसके चेहरे की जगह केवल एक धधकता हुआ गड्ढा था। ट्रेन की ब्रेक फेल हो चुकी थी और उस वीरान सुरंग में सोहन की चीखें हमेशा के लिए खो गईं।
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अटेरी की पुरानी डायरी

विक्रम को अपने नए पुराने घर की अटारी में एक धूल भरी डायरी मिली। डायरी के पन्ने पलटने पर उसे पता चला कि उसमें जो भी भविष्य की घटनाएँ लिखी थीं, वे सच साबित हो रही थीं। उसने उत्सुकतावश आगे के पन्ने पढ़े और सन्न रह गया। उस पर लिखा था कि आज रात ठीक बारह बजे विक्रम का परछाई से सामना होगा और उसकी साँसें थम जाएंगी। विक्रम ने हंसकर डायरी बंद कर दी और रात होने का इंतजार करने लगा। जैसे ही घड़ी की सुई बारह पर पहुँची, कमरे की बत्तियाँ बुझ गईं और आईने में उसकी खुद की परछाई ने मुस्कुराकर उसका गला दबाना शुरू कर दिया।
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सूनसान सड़क की लिफ्ट

कार से घर लौटते वक्त राहुल की गाड़ी एक सुनसान हाइवे पर अचानक खराब हो गई। चारों तरफ घना कोहरा था और मोबाइल के सिग्नल पूरी तरह गायब थे। तभी सड़क किनारे एक सफेद लिबास पहने औरत ने लिफ्ट के लिए हाथ उठाया। राहुल ने इंसानियत दिखाते हुए उसे गाड़ी में बिठा लिया, लेकिन गाड़ी के अंदर आते ही अजीब सी सड़ी हुई गंध फैल गई। जब राहुल ने रियर व्यू मिरर में देखा, तो उस औरत की आंखें गायब थीं और उसका चेहरा खून से सना हुआ था। उसने चीखकर ब्रेक मारा, लेकिन तब तक गाड़ी एक गहरी खाई में गिर चुकी थी।
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बंद संदूक का खौफ

अमित को अपने दादाजी के पुराने बक्से से एक हस्तलिखित डायरी मिली। जैसे ही उसने बक्से का ढक्कन पूरी तरह खोला, उसमें से एक ठंडी हवा का झोंका निकला और कमरे की मोमबत्तियां बुझ गईं। अंधेरे में उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसके कंधे पर हाथ रख कर कुछ पढ़ रही है। उसने तुरंत माचिस जलाई और डायरी के पन्ने पलटे तो पाया कि आखिरी पन्ने पर उसकी आज की मौत की तारीख लिखी हुई थी। ठीक उसी क्षण बक्से के अंदर से किसी ने जोर से नॉक किया और उसका दम घुटने लगा।
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अंधेरे कुएं की गूंज

पुश्तैनी बाग के बीच स्थित वह सूखा कुआं हमेशा से गांव वालों के लिए आकर्षण और भय का केंद्र रहा था। विक्रम ने चुनौती स्वीकार करते हुए आधी रात को उस कुएं में झांका। कुएं के अंदर से पानी की बूंदें टपकने की आवाज आ रही थी, जबकि वह पूरी तरह सूखा था। अचानक अंदर से किसी बच्चे की रोने की आवाज गूंजी। विक्रम ने टॉर्च की रोशनी नीचे डाली तो उसे पानी में उसका अपना ही चेहरा तैरता हुआ दिखा, जो क्रूरता से मुस्कुरा रहा था। अगले ही पल किसी ने उसे पीछे से गहरे कुएं में खींच लिया। सुबह उसकी टॉर्च कुएं की मुंडेर पर लावारिस मिली।
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लालटेन की रोशनी में छिपा सच

गांव के छोर पर बने एक पुराने मिट्टी के घर में सोहन अकेला रहता था। सर्द रात में जब उसने लालटेन जलाई, तो कमरे के कोने में एक अजीब सी परछाई हिलती हुई दिखाई दी। उसने सोचा यह उसका अपना साया होगा, लेकिन परछाई का हाथ स्वतंत्र रूप से उठ रहा था। डर के मारे सोहन का गला सूख गया और जब उसने भागने की कोशिश की, तो दरवाजे पर किसी ने अंदर से भारी ताला लगा दिया। तभी कोने से एक फुसफुसाती हुई आवाज आई, "अब तुम इस घर से कभी बाहर नहीं जा पाओगे।" सुबह जब ग्रामीण वहां पहुंचे, तो घर के अंदर सिर्फ एक बुझी हुई लालटेन और सोहन की घड़ी मिली।
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आधी रात का रेडियो प्रसारण

विकास को पुराने रेडियो सुनने का अजीब शौक था। एक दिन उसने अपना पुराना ट्रांजिस्टर ऑन किया और उसकी सुई घुमाने लगा। सभी आवृत्तियों पर केवल सन्नाटा था, सिवाय एक के जिस पर कोई पुरानी दर्द भरी आवाज में भविष्यवाणी कर रहा था। उस आवाज ने बिल्कुल ठीक वही बातें कहीं जो विकास उस समय अपने कमरे में कर रहा था। विकास डर गया और उसने रेडियो का स्विच ऑफ करके सेल निकाल दिए, लेकिन फिर भी वह आवाज उसी गति से बजती रही। अचानक रेडियो से एक हाथ बाहर निकला और विकास के कंधे को कसकर पकड़ लिया। जब सुबह उसकी मां कमरे में आईं, तो रेडियो चालू था और विकास की सांसें थम चुकी थीं।
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