नीले समुद्र की लहरों में छुपा प्यार
राघव हर साल उसी सुनसान तट पर आता था जहाँ उसने पहली बार मीरा को देखा था। लहरें आज भी वैसे ही रेत को छूकर लौट रही थीं जैसे कल की बात हो। मीरा अब इस शहर में नहीं थी, उसकी यादें ही इस हवा का हिस्सा बन चुकी थीं। अचानक उसे कंधे पर किसी के स्पर्श का अहसास हुआ। उसने मुड़कर देखा तो उसकी आँखें भर आईं। मीरा मुस्कुराते हुए उसके सामने खड़ी थी, वही पुराना विश्वास लिए हुए।
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