बदले हुए चेहरे

बदले हुए चेहरे

“
नकाब उतर ही गया आखिरकार एक दिन, जैसा सोचा था तुमको, वैसा पाया नहीं। हमने तो अपनी पूरी दुनिया बसा ली थी तुझमें, अफसोस तू इस काबिल कभी था ही नहीं।
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फरेब की रात

तेरी वफ़ा के किस्से अब हम किसे सुनाएं, जो खुद बदल गए उन्हें कैसे हम मनाएं। रातों ने हमारे अश्क चुपके से पी लिए, अब झूठे वादों के सहारे हम नहीं जिएं।